वन संपदा पर अब वन तस्करों की काली निगाहें टिकी
अल्मोड़ा, ( आखरीआंख ) पर्वतीय क्षेत्रों की अकूत वन संपदा पर अब वन तस्करों की काली निगाहें टिकी हुई हैं। वन तस्कर फायर सीजन का फायदा उठाकर जहां अपने काले कारनामों को अंजाम दे रहे हैं, वहीं वन महकमा करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी न तो जंगलों को बचा पा रहा है और न ही वन तस्करों पर नकेल कस पा रहा है। जिसका खामियाजा अब पहाड़ के लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
प्रदेश के पर्वतीय जिलों की बात करें तो यहां प्राकृतिक संपदा का अकूत भंडार है। ईमारती लकड़ियों के अलावा यहां तमाम तरह की जड़ी बूटियां भी पाई जाती हैं। लेकिन यह वन संपदा पिछले कुछ सालों से लगातार वन तस्करों की निगाह में है। फायर सीजन के नाम पर वन तस्कर जानबूझकर जंगलों में आग लगा रहे हैं। जंगलों में लग रही आग के कारण यहां होने पैदा होने वाली ईमारती लकड़ी के बड़े-बड़े पेड़ों को जड़ से जला दिया जाता है और उनके गिरने के बाद रात के अंधेरे में उन्हें काटकर उन पर हाथ साफ कर लिया जाता है। उल्लेखनीय है प्रदेश के पर्वतीय जिलों में अभी इतनी गर्मी नहीं पड़ रही है कि जंगल आग से धधकने लग जाएं। लेकिन इसके बाद भी जिस रफ्तार से जंगल राख में तब्दील हो रहे हैं उससे यह बात साफ है कि वन तस्कर फायर सीजन का किस तरह फायदा उठा रहे हैं। मई महीने की बात करें तो इसके शुरूआती सप्ताह में ही करीब तीन चार दिन रात के समय लगातार बारिश हुई। लेकिन बारिश के बंद होते ही फिर जंगल आग से धधकने लगे। इससे बड़े पेड़ जहां लगातार धराशाई हो रहे हैं वहीं वन तस्कर मौका मिलते ही उन पर हाथ साफ करने में भी कोई गुरेज नहीं कर रहे हैं। लेकिन सब कुछ जानने के बाद भी वन महकमा लाचारी के आंसू रो रहा है।
