इंग्लैण्ड का लेखक लिख रहा है उत्तराखंड होम स्टे पर किताब
देहरादून। इंग्ल ड के लीसेस्टर निवासी लेखक शेन बार्डाली पिछले साल जुलाई से उत्तरकाशी के गंगोरी स्थित ‘हिल ड्यू’ होम स्टे में रहकर साहित्य सृजन में जुटे ह । गढ़वाल की संस्कृति पर पुस्तक लिख रहे शेन कहते ह -”होम स्टे में पहली बार ठहरा हूं। इसमें यहां की संस्कृति, खान-पान से रूबरू होने का मौका मिला ही है, म खुद को एक परिवार के सदस्य के रूप में महसूस कर रहा हूं।’
न सिर्फ शेन बल्कि टाटा कंसल्टेंसी सर्विस पुणे में कार्यरत असिस्टेंट डायरेक्टर राजकुमार इसी साल जनवरी से यहां ठहरे ह और ‘वर्क फ्रॉम होम’ कर रहे ह । उनके मुताबिक होम स्टे में ब्रॉड ब ड अच्छा है। इसलिए आफिस का काम ऑनलाइन करने में परेशानी नहीं है। साथ ही वह सुबह-शाम अपनी बेटी के साथ सैर कर प्राकृतिक नजारों का लुत्फ उठा रहे ह । यह दो उदाहरण बयां करने को काफी ह कि बदली परिस्थितियों में होम स्टे अब किस तरह ‘वर्क स्टेशन’ के तौर पर उभर रहे ह । यूं कहें कि विभिन्न कंपनियों, संस्थाओं के कार्मिकों के लिए उत्तराखंड की वादियों में होम स्टे बेहतर विकल्प बने ह तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। इस पहल में पर्यटन विभाग सहयोग कर रहा है। अब तक 2774 होम स्टे विभाग में पंजीकृत हुए ह और उसी के जरिये मार्केटिंग हो रही है। विभाग ने ‘मेक माय ट्रिप’ से भी इन्हें जोड़ा है।
प्रदेश में पर्यटन आर्थिकी का बड़ा जरिया है। सामान्य परिस्थितियों में प्रतिवर्ष करीब साढ़े तीन करोड़ तीर्थयात्री और सैलानी यहां पहुंचते ह । पर्यटन का लाभ गांवों को भी मिले, इसी के दृष्टिगत लाई गई होम स्टे योजना। यात्रा मार्गों और पर्यटक स्थलों के इर्द-गिर्द के गांवों में घरों को होम स्टे में तब्दील करने की मुहिम जारी है। इसके लिए सरकार अनुदान भी देती है। शर्त यही कि होम स्टे स्वामी स्वयं वहां रहेगा और सैलानी पेइंग गेस्ट के तौर पर। होम स्टे में यहां के खान-पान को परोसा जाएगा और सैलानियों को सांस्कृतिक थाती से रूबरू कराया जाएगा। वर्ष 2022 तक 5000 होम स्टे के लक्ष्य के सापेक्ष अभी तक 2774 कार्यरूप में परिणत हो चुके ह । कोरोनाकाल में देशभर में विभिन्न कंपनियों, संस्थाओं ने वर्क फ्रॉम होम की परिपाटी शुरू की तो ध्यान होम स्टे की तरफ गया। वर्क फ्रॉम होम को ऐसे स्थल की जरूरत थी, जहां घर जैसी सुविधाएं हों। इंटरनेट भी ठीक से काम करे। होम स्टे इसके लिए मुफीद बने।
हिल ड्यू होम स्टे के संचालक अखिल पंत के मुताबिक बदली परिस्थितियों के मद्देनजर होम स्टे में वाई-फाई सुविधा समेत अन्य कदम उठाए गए। रोजाना ही देश के विभिन्न हिस्सों से लोग होम स्टे के संबंध में जानकारी ले रहे ह । टिहरी के देवलसारी स्थित होम स्टे कम्युनिटी सेंटर से जुड़े अरुण गौड़ के अनुसार उनके होम स्टे में भी दिल्ली, मुंबई समेत अन्य क्षेत्रों से लोग लगातार आ रहे ह ।पर्यटन विभाग उत्तराखंड के अपर निदेशक विवेक चौहान बताते ह कि होम स्टे योजना धीरे-धीरे ग्रामीण आर्थिकी के बड़े स्रोत के तौर पर उभरी है। होम स्टे का उपयोग वर्क स्टेशन के रूप में होने से नई उम्मीदें जगी ह । मेक माय ट्रिप से जोडऩे की पहल के भी अच्छे परिणाम सामने आए ह ।
