600 लीटर ‘मिथाइल अल्कोहल अहमदाबाद से बोटाद जिले लाया गया : कांग्रेस, 15 हजार करोड़ का होता है अवैध कारोबार
नई दिल्ली । कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने भारतीय जनता पार्टी पर यह आरोप लगाते हुए कहा कि तथाकथित शराबबंदी वाले गुजरात में जहरीली शराब पीने की वजह से 45 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है और 100 से ज्यादा लोग जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे हैं। पवन खेड़ा ने कहा कि हमारी सूत्रों की माने तो बोटाद जिले में 600 लीटर ‘मिथाइल अल्कोहल’ (मेथेनॉल) अहमदाबाद से लाया गया था। उसके बाद इसमें पानी मिलाकर जिले के विभिन्न इलाकों में बेच दिया गया। जिसके सेवन से या तो लोगों की जान चली गई या किडनी डैमेज हो गई है।इतने खतरनाक रसायनिक पदार्थ के उत्पादन और बिक्री पर सरकार की कड़ी निगरानी होनी चाहिए। लेकिन इस मामले में जो हुआ उससे कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।अहमदाबाद से ‘मिथाइल अल्कोहल बोटाद जिले में लाया गया, उसमें पानी मिलाया गया और शराब के रूप में लोगों को बेच दिया गया। एक ड्राई स्टेट में इतना सब कुछ हो जाए और स्थानीय पुलिस-प्रशासन को भनक तक नहीं लगे, ये संभव नहीं है। जरूर इसके पीछे सत्ताधारी दल के नेता, पुलिस-प्रशासन और शराब माफियाओं की मिलीभगत रही होगी। और ये सिर्फ आरोप नहीं है इसके पीछे ठोस आधार भी है। क्योंकि रोजीद गांव के सरपंच लगातार प्रशासन को पत्र लिख कर बता रहे थे कि गांव में सरेआम देसी शराब की बिक्री हो रही है। सरपंच ने एसपी तक को पत्र लिखा और गृह मंत्री तक भी अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की कि गांव में खुलेआम शराब बेची जा रही है, असामाजिक तत्व महिलाओं को परेशान कर रहे हैं और गालियां दे रहे हैं। गांव में किसी बड़े हादसे की आशंका है। लेकिन इस पर कोई एक्शन नहीं लिया गया। पवन खेड़ा ने कहा कि जहरीली शराब से जिन लोगों की मौत हुई है उनके परिजनों का मीडिया में रोते हुए बयान है कि यहां कोई शराबबंदी नहीं है, खुलेआम शराब बिक रही है। यदि पूरे गुजरात की बात करें तो करीब 15,000 करोड़ रुपए का सालाना अवैध शराब का कारोबार हो रहा है। मोदी जी के गाँव वडऩगर से लेकर हर जि़ले में शराब का ग़ैर क़ानूनी धंधा फल फूल रहा है। 2009 में भी ऐसी ही त्रासदी हुई थी। 150 जानें गयी थी। उस वक्त जितने भी लोग सस्पेंड हुए थे, वे सब फिर से बहाल कर दिए गए। इस बार भी मामले की कुछ वैसे ही लीपापोती की जा रही है। पवन खेड़ा ने कहा कि
इतना बड़ा मामला हुआ, करीब 50 लोगों की जान गई, 100 से ज्यादा लोग जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं लेकिन न तो गृह मंत्री ने, न मुख्यमंत्री ने और ना ही प्रधान मंत्री ने मृतकों के परिवारों से मुलाक़ात की। जबकि प्रधानमंत्री गुजरात में ही हैं। पवन खेड़ा ने कहा कि क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के गिरिराज गुजरात में करोड़ों का ड्रग्स पकड़ा जाना और शराब के अवैध कारोबार का इस तरह फलना फूलना महज संयोग नहीं हो सकता है। यह स्पष्ट तौर पर सत्ता के संरक्षण में किया जा रहा प्रयोग है। इसलिए हमारी मांग है कि जहरीली शराब कांड की हाई कोर्ट के सीटिंग जज द्वारा जांच होनी चाहिए। क्योंकि जिस पुलिस पर आरोप है यदि वही जांच करेगी तो जांच का कोई मतलब नहीं रह जाएगा। जहरीली शराब पीने की वजह से जिन लोगों की मौत हुई है उनमें से अधिकांश गरीब थे और घर चलाने की उन पर जिम्मेदारी थी। ऐसे परिवारों को समुचित मुआवजा दिया जाए। इस कांड की वजह से जिनकी आंखें चली गई हैं या किडनी डैमेज हो गई है उनके लिए मुफ्त और बेहतर इलाज की व्यवस्था हो।
