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October 28, 2026

सोशल मीडिया प्लेटफार्म बंद आक्रोश को चिंगारी


आज नेपाल का आंदोलन विश्व पटल पर चर्चा का विषय बन गया है। भारी हिंसा के बाद प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली और गृह मंत्री ने इस्तीफा दे दिया है। गौरतलब है कि पहले भी नेपाल में आंदोलन होते रहे हैं-मधेश आंदोलन, माओवाद आंदोलन।
ये सभी आंदोलन अपने हक और अधिकार के लिए ही लड़ते रहे, परंतु बहुत ही कम समय में जो वर्तमान आंदोलन ने स्वरूप लिया है वह बहुत कुछ कह रहा है। 22 प्रदर्शनकारियों की मौत के बाद सरकार को झुकने के लिए मजबूर होना पड़ा।
दरअसल, इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के पीछे सरकार द्वारा सोशल मीडिया पर (4 सितम्बर) प्रतिबंध लगाना रहा है। यह खबर पूरे नेपाल में आग की तरह फैल गई। आंदोलन की अगुवाई जेन जी समूह ने किया। जेन जी समूह 1997 से 2012 तक के बीच पैदा हुए लोगों का समूह है या यूं कह लीजिए नौजवानों का समूह है। सबसे बड़ी बात यह है कि किसी भी राजनीतिक संगठन से इस समूह का जुड़ाव नहीं है। जो तकनीकी रूप से भी सशक्त हैं या तमाम ऐसे तकनीकों का उपयोग करते हैं जिसमें सोशल मीडिया के भी सभी फॉर्म आते हैं। जेन जी समूह बांग्लादेश और श्रीलंका में भी चर्चा में हैं। युवाओं के समूह से ‘नेपो किडÓ नाम से अभियान चलाया जिसमें उन्होंने सच बात की।
मसलन; राजनीतिक व्यक्तियों के परिवारों को अलग से तरजीह, राजनीतिक और प्रभावशाली व्यक्तियों के बच्चों को गलत तरीकों से अर्जित धन हासिल कर या उन बच्चों को विशेषाधिकार मिलना, उनका रहन-सहन, गाड़ियों में घूमना,  पॉकेट खर्च सब अलग तरीक़े से दिखते थे। ये सारी बातें उन युवाओं के मन में चिढ़ और वैमनस्यता पैदा कर दिया, लेकिन वह ग्रुप कुछ कर नहीं पा रहा था, उनके सामने विवश था। इसके बाद सोशल मीडिया पर ‘नेपो किडÓ नाम से अभियान चलाया गया, जिसमें इसके साथ उन राजनीतिक और प्रभावशाली लोगों के भ्रष्टाचार को भी धीरे-धीरे उजागर करने लगे। अब यह एक बड़ा समूह बन गया। जिसका परिणाम ये हुआ कि राजनीतिक और प्रभावशाली व्यक्ति सरकार पर दबाव बनाने लगे।
दिन-प्रतिदिन उनके कारनामे सामने आ रहे थे। इसके प्रभाव में सरकार को सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाना पड़ा। व्हाट्सएप, एक्स सहित 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाकर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाने का आरोप लगाया था। इस दौरान प्रदशर्न हिंसक हो गया, जब प्रदशर्नकारियों ने संसद भवन के पास पुलिस के अवरोधकों को तोड़ दिया। प्रदशर्नकारियों को रोकने के आंसू गैस फिर गोली चलाया गया। जेन जी समूह प्रतिबंध के बाद और उग्र हो गया क्योंकि भ्रष्टाचार को भी इस आंदोलन के साथ जोड़ दिया गया। संसद परिसर में घुसने को उतारू  आंदोलनकारियों की भीड़ ने हिंसक रूप ले लिया। हिंसा और मौत के बाद कुछ मानवाधिकार संगठन भी जुड़ गए और न्याय की मांग करने लगे। अब एक कौतूहल का विषय यह भी है कि सरकार ने सभी सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगा दिया बावजूद इतने लोग इक_ा कैसे हो गए?

है कि प्रधानमंत्री ओली को सेना अज्ञात स्थान पर ले गई है। इस हिंसा में अब तक 22 लोग मारे जा चुके हैं, जबकि 400 से ज्यादा लोग घायल हैं। युवा बेरोजगारी, पलायन, चौपट हो चुकी अर्थव्यवस्था से पहले ही तनाव में था, वहीं सोशल मीडिया प्लेटफार्म बंद होने से  इस आक्रोश को चिंगारी मिल गई। लगता है 

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