मातृसम्मान से प्रकृति संरक्षण तक: ‘एक पेड़ माँ के नाम’ संगोष्ठी में हरियाली का जागृत संकल्प
बागेश्वर। देवकी लघु वाटिका में “एक पेड़ माँ के नाम” थीम पर आयोजित प्रेरणादायी संगोष्ठी ने मातृसम्मान और प्रकृति संरक्षण के बीच एक गहन भावनात्मक सेतु का निर्माण किया। मेरा युवा भारत एवं जन शिक्षण संस्थान, बागेश्वर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति को अपनी माँ के सम्मान में एक पौधा रोपित कर उसके संरक्षण का संकल्प दिलाना रहा। वातावरण में संवेदना, जागरूकता और कर्तव्यबोध की एक ऐसी धारा प्रवाहित हुई, जिसने कार्यक्रम को एक साधारण आयोजन से आगे बढ़ाकर सामाजिक चेतना के उत्सव का रूप दे दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, वृक्ष प्रेमी श्री किशन सिंह मलड़ा ने विभिन्न प्रकार के पौधों—पारिजात, चंदन, सहजन, रुद्राक्ष, बेल, औषधीय एवं सुगंधित पौधों, मूंगा, रेशम, बांस और चारा पत्ती आदि—पर अत्यंत गहन और विस्तृत व्याख्या प्रस्तुत की। उन्होंने पौधों के पर्यावरणीय, आध्यात्मिक और औषधीय महत्व को स्पष्ट करते हुए पौधारोपण की वैज्ञानिक विधियों की जानकारी दी। उन्होंने गड्ढे की उचित गहराई, जैविक खाद के प्रयोग, पौधे की सही स्थापना, प्रारंभिक सिंचाई, सुरक्षा घेरा, नियमित देखभाल और समय-समय पर निराई-गुड़ाई की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपनी माँ के नाम एक पौधा रोपित कर उसकी सेवा और संरक्षण का संकल्प ले, तो यह धरती और आने वाली पीढ़ियों के प्रति सच्ची कृतज्ञता का प्रतीक होगा।
जन शिक्षण संस्थान के निदेशक डॉ. जितेंद्र तिवारी ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि “एक पेड़ माँ के नाम” केवल एक प्रतीकात्मक अभियान नहीं, बल्कि जीवन भर निभाया जाने वाला नैतिक दायित्व है। उन्होंने सभी उपस्थितजनों को संकल्प दिलाया कि वे अपने घर-आंगन में एक पौधा अवश्य लगाएंगे, उसकी नियमित देखभाल करेंगे और इस संदेश को समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचाने का प्रयास करेंगे।
पूर्व प्रधानाचार्य श्री केशवानंद जोशी ने अपनी प्रेरणादायी कविता के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का भावनात्मक संदेश दिया, जबकि वरिष्ठ पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता श्री रमेश चंद्र पर्वतीय ने पर्यावरण के प्रति सामाजिक उत्तरदायित्व और जागरूकता की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में श्री राम सिंह मलड़ा, श्री भजन सिंह, श्रीमती देवकी माता जी, श्रीमती राधा गड़िया, श्रीमती रमा देवी, ममता, मनीषा, प्रशिक्षक हेमा बिष्ट, जया भाकुनी, दीपा चौबे, पूजा त्रिपाठी, लता लोहनी, संस्थान के सदस्य श्री बिक्रमजीत सिंह, आनंद सिंह शाही तथा प्रतिभागी दिव्या, रोशनी, कंचन, दीपा और वंदना सहित लगभग 60 लोगों की सक्रिय उपस्थिति रही। अंत में देवकी लघु वाटिका की ओर से प्रतिभागियों को पौधे वितरित किए गए और सभी ने यह संकल्प लिया कि वे अपने गाँव, घर और मोहल्ले में इस अभियान का व्यापक प्रचार-प्रसार करेंगे तथा अपने जीवन में कम से कम एक पेड़ अपनी माँ के नाम अवश्य लगाएंगे।
इसी प्रेरणादायी संकल्प और हरित चेतना के साथ कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हुआ, जिसने मातृभक्ति और प्रकृति संरक्षण को एक पवित्र सामाजिक अभियान के रूप में स्थापित करने का संदेश
