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October 14, 2026

पहाड़ों में पलायन रोकने के लिए हिल नीति बनाने की जरूरत: टिकैत


रुद्रपुर ।  भाकियू (टिकैत) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि उत्तराखंड में पलायन एक गंभीर समस्या है। राज्य के विकास व पलायन रोकने के लिए अलग-अलग से नीति बनानी होगी। विलेज टूरिज्म, जंगली जानवरों से लोगों का बचाव व कृषि का बचाव, तकनीकी सुविधाएं जरूरी हैं। सितारगंज में शुक्रवार को भाकियू के प्रदेश प्रवक्ता योगेंद्र यादव के कार्यालय में हुई प्रेसवार्ता में राकेश टिकैत ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्र के उत्पादों के लिए सरकार ट्रांसपोर्ट में सब्सिडी दे। पर्वतीय क्षेत्र में रहने वालों के लिए हिल पॉलिसी बनाने की जरूरत है। वहां पशु पालकों व दूसरे स्वरोजगार से जुड़े लोगों को हिल अलाउंस दिया जाना चाहिए। किसान अपनी खेती बाड़ी कर सके इसलिए जंगली सुअर, बंदरों से निजात के लिए कदम उठाने की जरूरत है। दशकों से घर बनाकर रह रहे परिवारों को उजाड़ने के बजाय उन्हें भूमिधरी अधिकार देने की मांग की। किसान नेता ने कहा कि सरकार देश में जंगल उजाड़कर खनन करवा रही है। वर्षों से रह रहे परिवारों को उजाड़कर जंगल लगाने की बात कर रही है। उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण पर कानून बनाने की मांग की। इससे पहने सितारगंज पहुंचने पर किसानों ने किसान नेता राकेश टिकैत व बलजिंदर सिंह मान का स्वागत किया। यहां यूपी व राज्य प्रभारी बलजिंदर सिंह मान, प्रदेश प्रवक्ता योगेंद्र यादव, बार एसोसिएशन अध्यक्ष दयानंद सिंह, राम बदन सागर, फैसल मलिक, सुग्रीव प्रसाद, लक्ष्मीनारायण, रामलाल यादव, तलविंदर सिंह, हरजीत सिंह, बलकार सिंह, सोना सिंह, राजू यादव, इंद्रजीत, सतीश अरोरा, सलमान खान, नन्हे खान, अकील, जफर खान मौजूद रहे। अमेरिका ने अपने किसानों के हित साधे, भारत सरकार ने साधा मौन भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि अमेरिका भारत के साथ डील पर लगातार अपने बयान जारी कर रहा है। जिसमें अमेरिका ने अपने किसानों के हित साधे हैं। जबकि भारत सरकार मौन है। उन्होंने कहा कि जो बयान सामने आ रहे हैं। वह देश के किसानों के अलावा हर वर्ग के लिए बेहद खतरनाक व बर्बादी के हैं। इसमें देश के लोगों की धार्मिक भावनाओं को भी आहत किया जा रहा है। आयातित पशु आहार और दूध व उसके उत्पादों से स्थानीय किसानों का पशुपालन खत्म होगा। किसानों की खेती समाप्त होगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका में पशु चारा मांसाहारी होता है। वहां का चारा देश में पहुंचेगा तो उन जानवरों के दूध से धार्मिक भावनाएं आहत होंगी।

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