प्रसव के कुछ घंटे बाद गर्भवती महिला की मौत, बैजनाथ अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
स्वस्थ बच्चे को जन्म देने के बाद अत्यधिक रक्तस्राव से बिगड़ी हालत, बागेश्वर रेफर करने के बाद महिला ने तोड़ा दम; परिजनों और क्षेत्रवासियों में आक्रोश
अर्जुन राणा
गरुड़/बागेश्वर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बैजनाथ में प्रसव के कुछ ही घंटे बाद एक गर्भवती महिला की मौत का मामला सामने आया है। महिला ने अस्पताल में सामान्य प्रसव के माध्यम से एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया, लेकिन इसके बाद अत्यधिक रक्तस्राव होने से उसकी हालत गंभीर हो गई। उसे रात में उच्च चिकित्सा केंद्र के लिए रेफर किया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना ने गरुड़ क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं, प्रसव के दौरान आपातकालीन तैयारी और रेफरल व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मृतका की पहचान भावना देवी, पत्नी मुकेश रावत, निवासी ग्राम सेलाबगड़, मैगड़ी स्टेट के रूप में हुई है। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है। एक ओर नवजात बच्चे के जन्म की खुशी थी, वहीं कुछ ही घंटों में मां की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
शाम 7:32 बजे दिया बच्चे को जन्म
जानकारी के अनुसार भावना देवी 25 जुलाई को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बैजनाथ पहुंची थीं। अस्पताल में शाम करीब 7 बजकर 32 मिनट पर उन्होंने सामान्य प्रसव के जरिए एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। प्रसव के दौरान किसी ऑपरेशन की आवश्यकता नहीं पड़ी।
लेकिन प्रसव के कुछ ही समय बाद महिला को अत्यधिक रक्तस्राव होने लगा। स्थिति बिगड़ने पर करीब रात 9:30 बजे उसे उच्च केंद्र के लिए रेफर कर दिया गया।
यहां सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि प्रसव और रेफरल के बीच के इस समय में महिला को किस प्रकार की आपातकालीन चिकित्सा उपलब्ध कराई गई और गंभीर रक्तस्राव की स्थिति में उसे उच्च केंद्र तक पहुंचाने के लिए क्या तत्काल व्यवस्था की गई?
बागेश्वर पहुंचने के बाद भी नहीं बच सकी जान
रेफर किए जाने के बाद महिला को बागेश्वर स्थित उच्च चिकित्सा केंद्र ले जाया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वहां उसे एक यूनिट रक्त चढ़ाया गया, लेकिन इसके बाद भी उसकी हालत में सुधार नहीं हो सका और उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
एक नवजात को जन्म देने के कुछ घंटों बाद मां की मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है।
अस्पताल प्रबंधन का क्या कहना है?
मामले में बैजनाथ अस्पताल की एमओआईसी डॉ. सपना राजपूत से जानकारी लेने पर उन्होंने फोन पर बताया कि मरीज 25 जुलाई को अस्पताल आई थी। उनके अनुसार महिला को पहले ही बताया गया था कि वह काफी कमजोर है और प्रसव के समय उसे रक्त की आवश्यकता पड़ सकती है।
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव होने पर महिला को तत्काल उच्च केंद्र के लिए रेफर किया गया। अस्पताल की ओर से यह भी बताया गया कि मरीज का ब्लड प्रेशर सामान्य नहीं था।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने एक अहम सवाल खड़ा कर दिया है—यदि अस्पताल को पहले से ही महिला के कमजोर होने और प्रसव के दौरान रक्त की आवश्यकता पड़ने की आशंका थी, तो हाई रिस्क प्रसव के लिए अस्पताल की तैयारियों और रेफरल प्लान की पहले से समीक्षा क्यों नहीं की गई?
ब्लड बैंक की सुविधा नहीं तो हाई रिस्क डिलीवरी पर सवाल
बैजनाथ अस्पताल में ब्लड बैंक की सुविधा नहीं होने की बात भी इस मामले को और गंभीर बनाती है। प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव मातृ मृत्यु का एक बड़ा कारण हो सकता है और ऐसी स्थिति में रक्त की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि चिकित्सकों को पहले से महिला के कमजोर होने और संभावित रक्त की जरूरत की जानकारी थी, तो क्या परिजनों को पहले ही ऐसे अस्पताल में प्रसव कराने की सलाह दी गई थी, जहां पर्याप्त रक्त और आपातकालीन सुविधाएं उपलब्ध हों?
क्या हाई रिस्क मरीज की पहचान प्रसव से पहले ही कर ली गई थी?
क्या मरीज को समय रहते उच्च केंद्र भेजने पर विचार किया गया था?
क्या अत्यधिक रक्तस्राव शुरू होते ही रेफरल की प्रक्रिया शुरू हुई?
और रेफर किए जाने के बाद मरीज को उच्च केंद्र तक पहुंचाने में कितना समय लगा?
इन सभी सवालों का स्पष्ट और तथ्यात्मक जवाब सामने आना जरूरी है।
गरुड़ क्षेत्र में पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
यह घटना इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि स्थानीय स्तर पर पहले भी प्रसव के दौरान महिलाओं की मौत के मामले सामने आने की बात कही जा रही है।
जानकारी के अनुसार पिछले वर्ष भोजगण गांव की एक महिला को अल्मोड़ा रेफर किया गया था, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। इसी तरह ग्राम पुरड़ा की एक महिला की मौत का मामला भी पिछले वर्ष सामने आया था।
यदि इन घटनाओं की परिस्थितियों में समानताएं हैं, तो स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों के लिए यह गंभीर समीक्षा का विषय होना चाहिए कि आखिर प्रसव के दौरान जटिलता आने पर मरीजों को समय पर आवश्यक उपचार क्यों नहीं मिल पा रहा है।
जांच से सामने आना चाहिए—कहां हुई चूक?
भावना देवी की मौत को केवल एक सामान्य चिकित्सा जटिलता मानकर मामला समाप्त नहीं किया जाना चाहिए। प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव जैसी स्थिति में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है।
इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि—
- महिला की अस्पताल में भर्ती के समय स्वास्थ्य स्थिति क्या थी?
- क्या उसे हाई रिस्क श्रेणी में रखा गया था?
- प्रसव से पहले आवश्यक जांचें और जोखिम का आकलन किया गया था या नहीं?
- अस्पताल में रक्तस्राव रोकने के लिए आवश्यक दवाएं और उपकरण उपलब्ध थे या नहीं?
- रक्त की आवश्यकता होने की स्थिति में अस्पताल की आपातकालीन व्यवस्था क्या थी?
- रेफरल का निर्णय किस समय लिया गया और रेफरल में कितना समय लगा?
- मरीज को उच्च केंद्र तक पहुंचाने में कितना समय लगा?
- बागेश्वर पहुंचने के बाद उसे किस स्थिति में उपचार मिला?
- क्या इस पूरे घटनाक्रम में किसी स्तर पर उपचार या रेफरल में देरी हुई?
इन सवालों के जवाब चिकित्सकीय रिकॉर्ड, प्रसव संबंधी दस्तावेज और रेफरल रिकॉर्ड की जांच के बाद ही सामने आ सकते हैं।
स्वास्थ्य विभाग की जवाबदेही जरूरी
गरुड़ क्षेत्र के लोगों के लिए यह घटना महज एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर गंभीर चिंता का विषय है। प्रसव जैसी संवेदनशील स्थिति में महिलाओं को सुरक्षित और समय पर चिकित्सा सुविधा मिलना स्वास्थ्य व्यवस्था की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों व सामाजिक कार्यकर्ताओं की मांग है कि मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या देरी सामने आती है तो जिम्मेदारी तय की जाए। साथ ही बैजनाथ अस्पताल में प्रसव संबंधी आपातकालीन सेवाओं, प्रशिक्षित स्टाफ, आवश्यक दवाओं, रक्त की उपलब्धता/समन्वय और रेफरल व्यवस्था की भी समीक्षा की जाए।
एक स्वस्थ बच्चे के जन्म के कुछ ही घंटों बाद उसकी मां का इस तरह दुनिया से चले जाना कई अनुत्तरित सवाल छोड़ गया है। अब जरूरत इस बात की है कि इन सवालों के जवाब महज आरोप-प्रत्यारोप में नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच और ठोस कार्रवाई के जरिए सामने आएं, ताकि भविष्य में किसी दूसरी मां की जान समय पर इलाज न मिलने के कारण न जाए।
