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October 17, 2026

हिस्‍ट्री शीटर है मंत्री रेखा आर्य का पति, कई मुकदमे हैं दर्ज


देहरादून ।  उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या और उनके पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी के बीच विवाद अब थाने तक पहुंच गया है। रेखा आर्या ने अपने पति के खिलाफ देहरादून के कैंट थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। शिकायत में उन्होंने पति पर अन्य महिलाओं से संबंध रखने, मारपीट करने, धोखाधड़ी, जालसाजी, जातिसूचक गालियां देने और उनकी हत्या की साजिश रचने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले ने प्रदेश की राजनीति में भी हलचल बढ़ा दी है।
पुलिस को दी गई शिकायत में रेखा आर्या ने पति के व्यवहार और कथित प्रताड़ना को लेकर कई आरोप लगाए हैं। इनमें मारपीट, धोखाधड़ी और जालसाजी के साथ हत्या की साजिश रचने का आरोप भी शामिल है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।
गिरधारी लाल साहू का उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में लंबा आपराधिक इतिहास रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनके खिलाफ बारादरी और इज्जतनगर थानों में कुल 39 मुकदमे दर्ज हुए थे। पहला मामला वर्ष 1981 में बारादरी थाने में बलवा और मारपीट के आरोप में दर्ज किया गया था।   वर्ष 1999 में उनकी हिस्ट्रीशीट खोली गई थी। उनके खिलाफ हत्या, जानलेवा हमला, बलवा और अन्य गंभीर आरोपों से जुड़े मामले भी दर्ज रहे। वर्ष 1986 और 2007 में गैंगस्टर एक्ट तथा वर्ष 1993, 1996 और 2007 में गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई का भी उल्लेख मिलता है।     रिपोर्ट के मुताबिक, कई वर्षों तक आपराधिक गतिविधियों में संलिप्तता सामने नहीं आने के बाद वर्ष 2014 से उनकी निगरानी बंद कर दी गई थी। पिछले 16 वर्षों से बरेली में उनके खिलाफ कोई नया मुकदमा दर्ज नहीं होने की बात भी सामने आई है। उनके परिवार का दावा है कि जैन दंपती हत्याकांड को छोड़कर अधिकांश मामले समाप्त हो चुके हैं।   गिरधारी लाल साहू का मुख्य कारोबार प्रॉपर्टी डीलिंग बताया जाता है। वह पूर्व में सभासद भी रह चुके हैं और खुद को भाजपा कार्यकर्ता बताते हैं।
मामले को लेकर कांग्रेस नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा ने भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों को गंभीर बताया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि पार्टी मंत्री रेखा आर्या के साथ कथित अन्याय और प्रताड़ना के मुद्दे को भी उठाएगी।
भाजपा सांसद अजय भट्ट ने विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी भी मामले के समाधान के लिए निर्धारित तरीके होते हैं। वहीं, कांग्रेस नेता डॉ. हरक सिंह रावत ने सवाल उठाया कि यदि महिला सशक्तीकरण विभाग संभालने वाली मंत्री ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम महिलाओं की सुरक्षा का क्या होगा?
फिलहाल, मामले में लगाए गए आरोपों की जांच और पुलिस की आधिकारिक कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। आरोपों के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित पक्षों का जवाब और जांच के निष्कर्ष सामने आना जरूरी है।

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