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October 31, 2026

धर्मपरायण होना और कट्टर होना दो अलग-अलग बातें:   हरीश रावत


 – सारा अली खान की केदारनाथ यात्रा पर फतवे से भड़के, कट्टरपंथियों को लताड़ा
देहरादून ।  अभिनेत्री सारा अली खान की केदारनाथ यात्रा को लेकर उठ रहे सवालों और फतवे जारी किए जाने की चर्चाओं के बीच पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।उन्होंने कहा कि धर्मपरायण होना और कट्टर होना दो अलग-अलग बातें हैं। किसी व्यक्ति की आस्था पर सवाल उठाना या उसे किसी धार्मिक स्थल पर जाने से रोकना उचित नहीं है। कट्टरपंथिता समाज और देश को किस दिशा में ले जाएगी, इस पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।
हरदा ने इंटरनेट मीडिया पर की गई पोस्ट में सारा अली खान की केदारनाथ यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि वह श्रद्धापूर्वक पिछली बार भी केदारनाथ पहुंची थीं और इस बार भी गईं। वह नवाब पटौदी और शर्मिला टैगोर की पोती तथा सैफ अली खान की बेटी हैं। उनकी अपनी आस्था है और वह अपने पिता से मिले धर्म का भी पालन करती हैं। इसके बावजूद कुछ कट्टरपंथी तत्व उनके केदारनाथ जाने पर फतवा जारी कर रहे हैं।पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इस्लाम में मूर्ति पूजा नहीं होती है, लेकिन आस्था और मूर्ति पूजा में अंतर है। कोई व्यक्ति किसी धार्मिक स्थल पर जाकर आस्था प्रकट कर रहा है तो उसे रोकने का अधिकार किसी को नहीं है। संभव है कि कोई वहां ध्यान लगाकर अल्लाह को भी याद कर रहा हो। उन्होंने कहा कि दुनिया की सारी भूमि नारायण, अल्लाह, गाड और भगवान की है।उन्होंने कहा कि कट्टरपंथिता से समाज और भारत पहले ही बहुत दुखी है। ऐसे तत्व किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हिंदू और मुस्लिम

नों समुदायों में मौजूद हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग केवल चर्चा में आने के लिए समाज में कटुता फैलाने का काम करते हैं।ऐसे लोग न हिंदुओं के हितैषी हैं और न मुसलमानों के। यहां तक कि वे अपने धर्म के भी हितैषी नहीं हैं। धर्म का पालन करना और उसके गुणों का प्रचार करना अलग बात है, लेकिन दूसरे की आस्था को रोकना कट्टरता है।

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