मेला सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं में विशेष स्थान रखता है: कन्याल
पिथौरागढ़ ( आखरीआंख ) थल के ऐतिहासिक बैसाखी मेले की पहली शाम स्थानीय और बाहर से आए कुमाऊंनी कलाकारों के नाम रही। कलाकारों ने अपनी गायकी से कुमाऊंनी संस्कृति का ऐसा रंग जमाया कि दर्शक झूमने पर मजबूर हो गए। देर रात तक पहाड़ी भजनों और गानों का दौर चलता रहा।थल मेले के पहले दिन सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ गणेश जोशी और जगजीवन कन्याल ने दीप जलाकर किया। गणेश जोशी ने कहा यह ऐतिहासिक मेला जिले की संस्कृति का वाहक है। इसके संरक्षण में पूरा सहयोग किया जाएगा। कन्याल ने कहा मेला सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं में विशेष स्थान रखता है। इसे और अधिक भव्य बनाने के लिए कदम उठाए जाएंगे। आकाशवाणी अल्मोड़ा के मनोहर आर्य ने भगवान शिव का भजन गाकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरूआत की। उनकी गायकी से पूरा मेलास्थल भक्तिमय हो गया। इसके बाद मां नैना सांस्कृतिक जन कल्याण सेवा समिति खटीमा से आए कलाकारों ने जमकर रंग जमाया। समिति के पुष्कर सिंह महर और सीमा विश्वकर्मा ने अपनी गायकी से सबका मन मोहा। दर्शकों ने भी तालियों से इनका जमकर साथ दिया। लोकगायक जितेंद्र तोमक्याल और गायिका चन्द्र कला देऊपा ने कुमाऊंनी गानों की प्रस्तुति देकर दर्शकों को पहाड़ी संस्कृति की झलक दिखाई। दोनों ने मिलकर मंच पर खूब धमाल मचाया। देवी भगवती मय्या तू दैणा है जाया, शुफल है जाया, ओ रंगीली धाना हौसीया पराना, यो डाना का पार, ओ नन्दा सुन्दा तू दैण हो जया गीत गाकर खूब वाहवाही लूटी। दर्शक ने पहाड़ी गानों का जमकर आनंद उठाया।
