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October 13, 2026

फोनी की फुफकार

ओडिशा और आसपास के राय पिछले दो दशकों के सबसे खतरनाक चक्रवाती तूफान का सामना कर रहे हैं। फोनी नाम के इस तूफान ने भारत के पूर्वी रायों की नींद उड़ा रखी है। अभी तक तीन लोगों के मारे जाने, बहुत सारे पेड़ गिरने, बिजली के खंभे उखडऩे और काफी भीतर तक समुद्री पानी घुस जाने की सूचनाएं हैं। लेकिन अभी तो तूफान का झटका गुजर ही रहा है। नुकसान का वास्तविक आकलन करने में वक्त लगेगा। तूफान के बारे में समय से सूचना मिलने और उसके अनुरूप जरूरी तैयारी करने की अहमियत इस बात से समझी जा सकती है कि 1999 में आए पिछले जिस महाचक्रवात से फोनी की तुलना की जा रही है, उसमें 15 हजार से यादा लोग मारे गए थे। इस बार करीब 12 लाख लोगों को पहले ही प्रभावित इलाकों से हटाकर उन्हें चक्रवात के लिए खास तौर से बनाए गए 880 केंद्रों पर 4000 शिविरों में ठहराया गया है।
इसके बावजूद अभी नहीं कहा जा सकता कि यह तूफान कितनी तबाही मचाकर जाएगा। वजह यह कि शक्तिशाली समुद्री चक्रवात जिन तटीय इलाकों से गुजरते हैं, वहां काफी स्थायी किस्म के नुकसान भी करते हैं। बांग्लादेश की ओर से इसे ‘फोनीÓ (सांप या सांप का फन) नाम यूं ही नहीं दिया गया है। चक्रवात जैसी विभीषिकाओं को साझा चुनौती की तरह लेने और उससे मिल-जुलकर निपटने की भावना के तहत ही इन तूफानों के नाम रखने की प्रक्रिया तय की गई है। इसके मुताबिक उत्तरी हिंद महासागर क्षेत्र में बनने वाले चक्रवाती तूफानों के लिए भारत, श्रीलंका, बांग्लादेश, मालदीव, यांमार, ओमान, पाकिस्तान और थाइलैंड- ये आठ देश क्षेत्रीय समिति को नाम भेजते हैं। हर देश को भविष्य में बनने वाले तूफानों के लिए आठ-आठ नाम भेजने होते हैं। फोनी नाम भी 64 नामों वाली इसी सूची से चुना गया है।
बहरहाल, इन तूफानों से तत्काल होने वाले विनाश को काबू करने से यादा बड़ी चुनौती आसपास के परिवेश, जमीन, नदी, तालाब, झील और जीव-जंतुओं को होने वाले दीर्घकालिक नुकसानों का अध्ययन करने की है। एक अन्य महत्वपूर्ण मोर्चा उन कारकों पर नजर रखने का है, जो इन तूफानों की आवृत्ति और इनकी ताकत बढ़ा रहे हैं। मानसून के बाद के तूफान सामान्य माने जाते हैं, लेकिन अप्रैल में ऐसे तूफान का बनना आम बात नहीं है। निश्चित रूप से यह एक जटिल प्रक्रिया है, लेकिन जानकारों के मुताबिक असमय तूफान जैसी विभीषिकाओं की आवृत्ति बढऩे के पीछे ग्लोबल वार्मिंग की भी एक बड़ी भूमिका हो सकती है। किसी एक देश की सरकार यह तो सुनिश्चित कर सकती है कि तूफान आने पर अपने लोगों के जान-माल को यादा नुकसान न होने दिया जाए, जलवायु में आ रही बीमारी से निपटने की चुनौती तो पूरी दुनिया को मिल-जुलकर ही स्वीकार करनी पड़ेगी। यह काम हम जितनी जल्दी कर पाएं, उतना ही बेहतर।

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