मनरेगा मजदूरी में वृद्धि ,ऊट के मुँह में जीरा,मजदूरों के साथ मजाक
बागेश्वर । जिला किसान संगठन के सचिव अर्जुन राणा ने मनरेगा की मजदूरी दरों में वृद्धि को ऊंट के मुंह में जीरा बताते हुए कहा कि भारत सरकार ने मनरेगा की मजदूरी की नई दरों की अधिसूचना जारी कर उत्तराखंड में 1 अप्रैल से मनरेगा की मजदूरी 213 रुपये करने का कहा है। मजदूरी में मात्र 11 रुपये की वृद्धि की गई है, जो कि हास्यास्पद है। प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि जिस अनुपात में पिछले एक साल में महंगाई ने कीर्तिमान बनाया है, उसके मुकाबले मजदूरी में वृद्धि हास्यास्पद है। मनरेगा एक सार्वभौमिक कार्यक्रम है। देश के करोड़ों-करोड़ जरूरतमंद इसमें शामिल हैं। इसलिए मजदूरी में परिवर्तन महंगाई सूचकांक के अनुसार होना चाहिए। इसकी गणना हर छह माह में होनी चाहिए। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार मनरेगा श्रमिक केन्द्र सरकार की मेहरबानी पर निर्भर है। जबकि मनरेगा में 100 दिनों के लिए काम की गारंटी का कानूनी अधिकार है।
उन्होंने केंद्र व राज्य सरकार से मांग की है कि वर्तमान में महंगाई को देखते हुए मनरेगा मजदूरों की दिहाडी कम से कम 500 रुपये प्रतिदिन होनी चाहिए और साथ ही प्रत्येक मजदूर को साल में 200 दिन का रोजगार दिया जाना नितांत आवश्यक हैं जिससे कि उसकी रोजीरोटी चल सके ।
