March 11, 2026

भारत जोड़ो यात्रा खींचेगी बड़ी लकीर : रमेश कृषक

बागेश्वर । राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है वैसे वैसे यात्रा की असल राजनीति भी सार्वजनिक हो रही है। यात्रा को लेकर शुरूआती दौर में कांग्रेस के विपक्ष में खड़े राजनीतिक दलों के माथों मैं सिकन थी और ना ही कोई चर्चा या चिंता हीथी। शुरूआती दिनों में तो ऐसा ही लग रहा था कि कॉग्रेस विपक्ष की राजनीति में अपने को मजबूत स्थिति में लाने के लिए कोई प्रयास कर रही है। ऐसा लगने के पीछे जो कारण था वह भी साफ था की नीतीश कुमार द्वारा एनडीए को विदा कहने के बाद सिर्फ बिहार की राजनीति में ही हलचल नहीं हुई थी वरन राष्ट्रीय स्तर पर भी राजनीति में छोटे स्तर पर ही सही पर लहर बनी थी और श्री नीतीश कुमार को विपक्ष के हीरो के रूप में भी प्रस्तुत किया जाने लगा था।
जब राहुल गांधी ने कन्याकुमारी से यह यात्रा प्रारंभ की थी तब भारत के उस मीडिया ने यात्रा को किसी भी प्रकार की तवज्जो नहीं देने का मन बनाया था जिस मीडिया को रवीश कुमार गोदी मीडिया के नाम से पुकारते हैं और बताते हैं। राष्ट्रीय मीडिया होने के दम्भ से लवरेज उस मीडिया ने कुछ ऐसा माहौल बनाया जो यह प्रचार करता दिख रहा था कि राहुल की यात्रा बेसिर पैर की यात्रा है। जैसे-जैसे यह यात्रा आगे को बड़ी और बढ़ती गई वैसे वैसे इस यात्रा को उन प्रांतों के समाजों ने हाथों हाथ लिया जिन प्रांतों में यह यात्रा शुरुआती दौर मैं गुजरी। शुरूआती दौर के प्रांतों से बाहर टटोलें तो राहुल गांधी की यात्रा धीरे धीरे से ही सही पर सिर्फ राष्ट्रीय स्तर पर ही जन चर्चा में नहीं आई वरन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यह यात्रा राजनीतिक चर्चा के रूप में स्थापित हुई। भले ही कांग्रेस के इतर यूपीए और एनडीए के अन्य राजनीतिक दल खुलकर नहीं बोल सकेंगे पर इस यात्रा के साथ जिस तरह से और जिस प्रकार के लोगों का समर्थन भीड़ के रूप में घरों और मुहल्लों से बाहर निकला उस समर्थन की चिंता सिर्फ यूपीए के उन संगठनों में ही नहीं ऊभरी है जो संगठन विपक्ष का नेतृत्व करने के लिए रास्ते तलाश रहे थे बल्कि चिंता की बड़ी शिकन एनडीए के संगठनों के माथों पर भी ऊभरी ही है।
आज से सिर्फ 2 दिन पूर्व इस यात्रा में भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन के शरीक होते हैं और रघुराम राजन के शरीक होने के बाद राहुल गांधी और रघुराम राजन के बीच चर्चा का जो वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ है या करवाया गया है उस वीडियो के संवाद आने वाले समय में भारत की राजनीति के लिए बहुत कुछ संकेत भी दे रहा हैं।
राहुल गांधी की यात्रा का एक पक्ष यह भी है कि इस यात्रा ने भारत की राजनीति में कई लंबी लकीरें भी खींच दी हैं। ये लकीरें वर्तमान राजनीति के तौर तरीकों और चलन पर ही प्रभाव डालती प्रीत नहीं हो रही हैं वरन् दलों के अंदर के चलन और प्रचलन के लिए ही बड़ी चुनौती बनती हुई दिखाई दे रही है। इस यात्रा के माध्यम से श्री राहुल गांधी ने यह संदेश तो देश दुनिया की राजनीति को दे ही दिया है कि विपक्षी राजनीति का मतलब तू तड़ाक, अनर्गल भाषा, वाहियात बातें और बेसिर पैर की हवा हवाई बातें नहीं होना चाहिए बल्कि विपक्ष का मतलब सत्ता और समाज के लिए ऐसा कक्ष बनाना होना चाहिए जिस कक्ष से निकलने वाले संवादों को लोकतंत्र की तात्कालिक समृद्ध ही नहीं वरन स्थाई समृद्धता के लिए जाना जाए और गैर राजनीतिक लोग , संगठन, समूह भी उस कक्ष की बहस के खुले हिस्सेदार के रूप में सामने आएं।
राहुल गांधी और रघुराम राजन के बीच जो चर्चा सामने आई है उस चर्चा में कई चिंताएं भी उभरी है मसलन हम 4 या 5 पूजी पतियों का हिंदुस्तान बनाएं या गरीबों, लोअर मध्यवर्ग, मध्यवर्ग और अपर मुख्य वर्ग का हिंदुस्तान बनाएं। इस चर्चा में स्केल और लार्ज इंडस्ट्रीज की सीमाओं पर बेहद गंभीर संवाद सामने आया है जो एक नए भारत के लिए जरूरी संवाद लगता है। यह चर्चा बताती है कि भारत को नए सिरे से दूसरी हरित क्रांति की जरूरत है जो कृषि क्षेत्र के स्थायित्व के साथ-साथ इंडस्ट्रियल कांपलेक्स के स्थायित्व की भी गारंटी देती हो। चर्चा में रघुराम राजन ने तो बकायदा ग्रीन कंपोनेंट और इंटेक शब्दों का इस्तेमाल किया है। चर्चा में राहुल गांधी चिंता बिखेरते हैं कि छोटी कंपनी बड़ी कंपनी क्यों नहीं बन पा रही, चिंता को आगे बढ़ाते हुए कहते हैं कि छोटी कंपनियां कुछ साल बाद खत्म या धूलधूषरित क्यों हो रही है। चर्चा में राहुल गांधी जब हल्दीराम का जिक्र करते हैं तो रघुराम राजन बताते हैं कि there are many haldirams.
इसी चर्चा में यह बात सामने आना भी महत्वपूर्ण है कि भारतीय फसलों के पकते समय एक्सपोर्ट इंपोर्ट पॉलिसी के खतरनाक खेल किये जाते हैं जो किसानी को बुरी तरह से प्रभावित करते हैं ।
चर्चा में रघुराम राजन ने जोर देते हुए कहा कि सिर्फ छोटी बड़ी कंपनियों से ही नहीं बल्कि भारत में बहुत बड़े स्तर पर रोजगार एग्रीकल्चर सेक्टर से निकल सकता है। कुछ देशों द्वारा सर्विस बेचने के लिए शुरू किए गए प्रयोगों पर भी इन दोनों के बीच चर्चा हुई । चर्चा में राहुल गांधी का यह साफ कहना की यह प्रयोग शिक्षा के स्तर और गुणवत्ता पर निर्भर करता है इसके लिए प्राइमरी एजुकेशन से लेकर हायर एजुकेशन तक चीजों को समझना होगा काफी परिपक्व संवाद है।
खैर, फिलहाल राहुल गांधी की यात्रा के बीच में रघुराम राजन और राहुल गांधी के बीच कि यह चर्चा भविष्य में उस बहुत बड़ी लकीर के रूप में सामने आएगी जो लकीर आने वाले समय में देश की राजनीति, राजनीति में सरकार ,विपक्ष, राजनीतिक दलों के अंदर के स़ंगठनात्मक और नीतिगत तौर-तरीकों और चलन में बदलाव का इशारा तो कर ही गयी है।