वनाग्नि प्रबंधन के लिए वापस मिलें स्थानीय लोगों के हक
देहरादून । प्रदेश में लगातार धधक रहे जंगलों को केवल स्थानीय लोगों के उनके हक हकूक वापस देकर ही बचाया जा सकता है। वर्ना पूरे प्रदेश का सरकारी अमला और संसाधन भी कम जंगलों की आग नहीं बुझा सकते। ये कहना है जाने माने पर्यावरणविद और राज्य आंदोलनकारी ओमप्रकाश डंगवाल का। डंगवाल मंगलवार को सचिवालय में मुख्य सचिव राधा रतूड़ी से मिले और उन्हें एक मांगपत्र भी दिया। डंगवाल के अनुसार राज्य में 1995 से पहले आग की कम घटनाएं थी। लेकिन उसके बाद लगातार जंगल जलने लगे। इसके पीछे अंधाधुंध कटान और हक हकूक पर रोक मुख्य वजह रही। जो कि आज तक जारी है। ऐसे में लगातार जंगल जलते जा रहे हैं। डंगवाल के अनुसार 1995 में यूपी के वक्त ये तय हुआ था कि जंगलों की आग से निपटने के लिए स्पेशल टॉस्क फोर्स यानी एसटीएफ का गठन किया जाए। जो कि केवल जंगलों की आग से निपटने का काम करे। लेकिन राज्य बनने के बाद से अब तक इसका गठन नहीं हुआ। ये फोर्स विशेष तौर से आग बुझाने के लिए ट्रेनिंग और उपकरणों से लैस की जानी थी। सरकार को इस पर विचार करना चाहिए। उन्होंने ये भी कहा कि हक हकूक वापस मिलने के बाद लोग जंगलों को अपना समझेंगे। जो कि अभी नहीं है। इसी वजह से वे जंगलों को बचाने में दिल से सहयोग नहीं करते। ओमप्रकाश डंगवाल लंबे समय तक पर्यावरणविद सुंदरलाल बहुगुणा और इंद्रमणि बडोनी के साथ पर्यावरण व अन्य मुद्दों के लिए आंदोलन कर चुके हैं।
