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October 13, 2026

वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम के खिलाफ एफआईआर पर मान्यता प्राप्त पत्रकार संघ ने जताई गहरी नाराजगी


अध्यक्ष विजय शंकर चतुर्वेदी बोले – यह लोकतंत्र पर सीधा हमला
सत्ता की जवाबदेही चाहने वाले पत्रकारों को डराने की कोशिश: विजय शंकर चतुर्वेदी
पत्रकारिता पर वार: लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को कमजोर करने की कोशिश?
नई दिल्ली । वरिष्ठ और निर्भीक पत्रकार अजीत अंजुम के खिलाफ बिहार में दर्ज एफआईआर को लेकर पत्रकारिता जगत में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। मान्यता प्राप्त पत्रकार संघ (रजि.) ने इस घटना को लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा हमला करार देते हुए गहरी चिंता और रोष प्रकट किया है। संघ ने कहा कि यह मामला सिर्फ एक पत्रकार पर कार्रवाई का नहीं, बल्कि पूरे लोकतांत्रिक ताने-बाने को दबाने की कोशिश है। अजीत अंजुम, जो ्र्र्र मीडिया न्यूज़ चैनल के प्रधान संपादक हैं, ने मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान के दौरान बीएलओ स्तर पर हो रही अनियमितताओं को उजागर किया था। उनके तथ्यों पर आधारित साहसिक रिपोर्टिंग के बाद उन पर एफआईआर दर्ज की गई, जिसे पत्रकार समाज ने ‘दमनकारी प्रवृत्तिÓ करार दिया है। संघ के अध्यक्ष विजय शंकर चतुर्वेदी ने अजीत अंजुम के पक्ष में सशक्त बयान देते हुए कहा, “अजीत अंजुम निष्पक्षता और सत्य पर आधारित पत्रकारिता के प्रतीक हैं। उन पर एफआईआर दर्ज करना प्रेस की आज़ादी पर सीधा प्रहार है। प्रशासन का यह कदम न केवल निंदनीय है, बल्कि एक खतरनाक उदाहरण भी प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता की जवाबदेही तय करने के लिए स्वतंत्र मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। अगर पत्रकारों को सच उजागर करने पर दंडित किया जाएगा, तो यह न केवल प्रेस की स्वतंत्रता को कमजोर करेगा, बल्कि जनता के अधिकारों को भी चोट पहुंचाएगा। यह मामला सिर्फ एक एफआईआर नहीं है, यह पत्रकारिता की आत्मा पर प्रश्नचिह्न है। जिस समाज में पत्रकारों को सच बोलने की सजा मिलती है, वह समाज अपने लोकतांत्रिक मूल्य खोने के कगार पर होता है। प्रेस की आज़ादी की रक्षा के लिए यह समय एकजुटता और संघर्ष का है।

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