हॉट सीट अणा: किसका पलड़ा रहेगा भारी, कौन पड़ेगा राजनीति के ‘चक्रव्यूह’ में भारी?
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अर्जुन राणा
बागेश्वर गरुड । जिले की सबसे हॉट और चर्चित जिला पंचायत सीट – अणा क्षेत्र – इस बार राजनीतिक रणभूमि बनी हुई है। चारों तरफ चर्चाओं का बाज़ार गर्म है, झंडे-बैनरों से गलियाँ गुलज़ार हैं और समर्थकों की भीड़ से सड़कों पर ‘धूल ही धूल उड़ रही है’। कौन मारेगा बाज़ी, यह सवाल हर जुबां पर तैर रहा है।
इस सीट का महत्व इसलिए भी खास है क्योंकि यहीं से निकल चुके हैं कपकोट के पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण और वर्तमान में दर्जा राज्य मंत्री शिव सिंह बिष्ट। यानी यह सीट न केवल राजनीतिक अनुभव की नर्सरी रही है, बल्कि सत्ता के गलियारों तक पहुंचाने वाली ‘चाबी’ भी साबित हो चुकी है।
मैदान में तीन धुरंधर – चौथा ‘खेल से बाहर’
इस बार मैदान में तीन उम्मीदवार पूरी ताकत से ताल ठोक रहे हैं। चौथे उम्मीदवार कृष्णा पांडे, भूपाल सेन हत्याकांड/आत्महत्या मामले में नामजद होने के चलते फिलहाल ‘दांव से बाहर’ नजर आ रहे हैं।
भाष्कर बोरा – ‘नया खिलाड़ी
निर्दलीय उम्मीदवार भाष्कर बोरा पहली बार चुनावी दंगल में उतरे हैं।
राजनीतिक अनुभव के बारे में वे इन दोनों के मुकाबले कुछ कमतर नजर आते हैं। लेकिन अपने प्रचार अभियान में इन दोनों के समकक्ष ही नजर आते हैं।
सुनील दोसाद – ‘पुराना खिलाड़ी, नई बिसात’
सुनील दोसाद, पिछली बार अपनी पत्नी के नाम पर चुनाव जीत चुके हैं। तब बीजेपी से टिकट न मिलने के कारण “खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे” वाली स्थिति में निर्दलीय लड़े, लेकिन जनता की सहानुभूति ने उन्हें जीत दिलाई। अब वे फिर से बीजेपी की छतरी में हैं, मगर इस बार विपक्षी खेमा मजबूत है और जनता का रुख बदलता नजर आ रहा है। “एक बार धोखा खाया हुआ आदमी हर कदम पर सोचता है”, ऐसे में जनता अब सतर्क है। एन्टीनकम्बेंसी उन्हें कितना डैमेज करती हैं। यह अब चुनाव परिणाम ही तय कर पायेगा।
हरीश जीना – ‘अनुभव की तिजोरी’
हरीश जीना इस बार मैदान में “तू डाल-डाल तो मैं पात-पात” की रणनीति के साथ उतरे हैं। तीन बार ग्राम प्रधान और एक बार क्षेत्र पंचायत सदस्य रह चुके जीना को लोग “काजू-बादाम नहीं, अनुभव की खुराक” मान रहे हैं। सामाजिक कार्यों से मिली पहचान और लोगों से जुड़ाव ने उन्हें मजबूत स्थिति में ला कर खड़ा कर दिया है। जिससे सभी के दिलों की धड़कनें तेज कर दी हैं।
जनता के दिल में उठ रहा सवाल – “बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधे?”
राजनीतिक गणित के इस तीखे समीकरण में हर प्रत्याशी अपनी चाल चल रहा है, लेकिन मतदाता भी अब “आंधी में दिया जलाने” जैसे फैसले नहीं लेता। वह परख रहा है, सोच रहा है और “सोने पे सुहागा” वाले नेता को वोट देने की तैयारी कर रहा है।
अणा की हॉट सीट पर हर दिन नया मोड़ आ रहा है। कभी समर्थकों की रैलियों में नारों की गूंज तो कभी नए चेहरे की एंट्री, माहौल “रामलीला के मंच” जैसा बन गया है – दर्शक भी और निर्णायक भी जनता ही है।
सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे” — ऐसी रणनीति बनाना इस बार किसी भी प्रत्याशी के लिए आसान नहीं। जीत का सेहरा उसी के सिर बंधेगा जो सियासत की बिसात पर सबसे चतुर मोहरा बनकर उभरेगा।
यहाँ पर आपको यह भी बताते चले कि जनता ने अपने पत्ते अभीतक बंद ही कर रखे हैं। और स्पष्ट तौर पर अधिकांश जनता खुलकर नही बोल रही हैं।
अब देखना यह है कि गरुड़ की इस हॉट सीट पर किसकी लगेगी लॉटरी, और कौन होगा वह नेता, जो अगले पांच वर्षों तक जिले की इस हॉट सीट पर राज करेगा।
