January 30, 2026

जल संरक्षण के महत्व


विश्व भर में सभी देशों में जल संरक्षण के महत्त्व को समझने व समझाने के लिए विश्व जल दिवस मनाया जाता है। बढ़ते जल संकट की ओर ध्यान आकषिर्त करने के लिए विश्व जल दिवस को यूएन ने प्रमुखता दी है।
हर साल इसकी अलग थीम भी रखी जाती है। इस वर्ष विश्व जल दिवस की थीम क्या है? क्या है इसके मायने? कैसे हुई इसकी शुआत? दुनिया को क्यों इस ध्यान देने की जरूरत है।
जल ही जीवन है। यह लाइन तो कई बार सुनी होगी, आज भी बढ़ते जल संकट के बीच, इस लाइन को सार्थक करने के प्रति मानव की सजगता और जागरूकता अपने मुकाम तक नहीं पहुंची जहां वह खुद जीवन बचाने के लिए दिखाई दे।
जल संरक्षण के मामले में भी तस्वीर धुंधली दिखाई देती है हम सुनते आए हैं कि जल ही जीवन है। कुछ दशक से वैश्विक स्तर पर पानी की बढ़ती खपत और गहराते पानी संकट पर विमर्श बहुत हुआ विशेषज्ञों ने चेताया भी लेकिन जमीनी स्तर पर खासकर भारत जैसे देश में जल संरक्षण को लेकर जागरूकता बेहद कम नजर आती है।  अभी तक हमें पूर्णता स्वच्छ जलापूर्ति नहीं हो पाई है।
बड़ी वजह यह है कि बात तो खूब होती है कि क्या जाना चाहिए। इसे कोई भी अपने स्तर पर जिम्मेदरी उठाने को तैयार नहीं दिखता है। यह व्यवस्था सरकार के भरोसे पर छोड़ दी जाती है अपने स्तर पर लोग न तो जल के बेतहाशा बरबादी को लेकर सचेत नजर आते हैं न ही जल संरक्षण के प्रयासों की दिशा में कार्यरत दिखाई देते हैं।
नहाते समय अनावश्यक रूप से पानी ना बहाएं ब्रश करते समय बर्तन धोते समय और खाना बनाते समय नल खुला छोड़ कर कुछ ना करें।  पौधे लगाए और बाढ़ व तूफान से बचाव के लिए प्राकृतिक व्यवस्था में योगदान दें।  यह जनना बेहद जरूरी है कि पृथ्वी पर थोड़ा सा पानी ही पीने लायक है।
जानकर यह हैरानी होगी कि 71 प्रतिशत पृथ्वी की सतह पर कुल पानी है।  इसमें से 97 प्रतिशत पानी सागर, महासागरों में है जो खारा है व पीने खेती करने या उद्योगों में प्रयोग के लायक नहीं है।  3 प्रतिशत पानी ही ताजा पानी की श्रेणी में आता है जो प्रयोग किया जा सकता है 2.5 प्रतिशत ताजा पानी ग्लेशियर, ध्रुवी बर्फ, वाष्प और मिट्टी में नमी के रूप में पाया है जिस तक पहुंच पाना असंभव है।

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