देवदूत बनी बागेश्वर पुलिस: अंगीठी के धुएँ से अचेत परिवार को समय रहते अस्पताल पहुँचाकर प्रभारी निरीक्षक ने बचाई अनमोल जिंदगियाँ
बागेश्वर। जनपद बागेश्वर में पुलिस ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि वह केवल कानून-व्यवस्था की प्रहरी ही नहीं, बल्कि संकट की घड़ी में आम नागरिकों की सच्ची रक्षक भी है। पुलिस अधीक्षक बागेश्वर के निर्देशन में ‘मित्रता, सेवा और सुरक्षा’ के संकल्प को साकार करते हुए कोतवाली बागेश्वर पुलिस ने अंगीठी के जहरीले धुएँ से अचेत हुए एक पूरे परिवार को मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया।
दिनांक 09 जनवरी 2026 को पुलिस सहायता नंबर 112 के माध्यम से सूचना प्राप्त हुई कि कोतवाली बागेश्वर क्षेत्रान्तर्गत दाडिम तोक निवासी एक परिवार बंद कमरे में अंगीठी जलाकर सो गया है। अंगीठी से निकले कार्बन मोनोऑक्साइड गैस के प्रभाव से परिवार के सभी सदस्य—दो वृद्ध दंपत्ति, एक महिला तथा उनका मात्र एक वर्ष का मासूम पुत्र—अचेत अवस्था में पड़े हैं। सूचना की गंभीरता को भांपते हुए प्रभारी निरीक्षक कोतवाली बागेश्वर श्री अनिल उपाध्याय ने बिना किसी विलंब के स्वयं पुलिस टीम के साथ मौके के लिए प्रस्थान किया।
घटनास्थल पर पहुँचने पर पीड़ितों की स्थिति अत्यंत नाजुक पाई गई। समय की एक-एक साँस की कीमत समझते हुए प्रभारी निरीक्षक ने तत्काल एम्बुलेंस को मौके पर बुलाया और मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए पुलिस वाहन से एम्बुलेंस को एस्कॉर्ट कर ट्रैफिक क्लियर कराते हुए जिला अस्पताल भिजवाया। पुलिस की इस असाधारण तत्परता के कारण पीड़ितों को समय पर चिकित्सकीय सहायता मिल सकी और एक बड़ा अनहोनी टल गई।
पुलिस की इस सराहनीय कार्रवाई से न केवल एक परिवार की जान बची, बल्कि समाज में पुलिस के प्रति विश्वास और सम्मान भी और अधिक गहरा हुआ है। स्थानीय नागरिकों ने संकट की इस घड़ी में पुलिस द्वारा दिखाई गई संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण की मुक्तकंठ से प्रशंसा की है। जिला अस्पताल में पीड़ितों का उपचार जारी है और चिकित्सकों के अनुसार अब सभी की स्थिति खतरे से बाहर बताई जा रही है।
बागेश्वर पुलिस ने इस घटना के माध्यम से पुनः आमजन से अपील की है कि शीतकाल में बंद कमरों में अंगीठी, कोयला अथवा किसी भी प्रकार के हीटर जलाकर सोने की भूल न करें। यह लापरवाही जानलेवा सिद्ध हो सकती है। सतर्कता और सावधानी ही ऐसे हादसों से बचाव का एकमात्र उपाय है।
