अधिकारियों की सुरक्षा के बहाने जन आंदोलनों को दबाने की साजिश
देहरादून । सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए जारी नई एसओपी पर विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने तीखा हमला बोला है। गुरुवार को भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) समेत विभिन्न संगठनों ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित कर इस पर गंभीर आपत्तियां जताईं। विपक्षी संगठनों का कहना है कि सरकार कर्मचारियों की सुरक्षा के नाम पर लोकतांत्रिक आवाजों और जन आंदोलनों को कुचलने की तैयारी कर रही है। माकपा सचिव अनंत आकाश ने कहा कि प्रदेश में अधिकारियों पर हमले की जितनी भी घटनाएं हुई हैं, उनमें अधिकांशतः सत्ताधारी भाजपा के मंत्री, विधायक या प्रभावशाली नेता शामिल रहे हैं। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि सरकार पहले अपने ‘माननीयों’ को नियंत्रित करने के बजाय जनता पर शिकंजा कस रही है। अक्सर देखा गया है कि सत्ता के दबाव में पीड़ित अधिकारियों पर ही फर्जी केस दर्ज कर मामलों में लीपापोती कर दी जाती है। ज्ञापन देने वालों में संयुक्त परिषद के संरक्षक नवनीत गुसांई, यूकेडी नेत्री प्रमिला रावत, बालेश बबानिया, बृजेन्द्र रावत, लेखराज, सुरेश कुमार, चिंतन सकलानी, अभिषेक भंडारी और हिमांशु चौहान मौजूद रहे।
