April 8, 2026

शोभायात्रा से लेकर सांस्कृतिक वैभव तक—कत्यूर महोत्सव बना जनआस्था और लोकजीवन का महापर्व


बागेश्वर , गरुड । कत्यूर घाटी की सांस्कृतिक अस्मिता और लोकजीवन की जीवंतता का विराट उत्सव बन चुका कत्यूर महोत्सव इस वर्ष अभूतपूर्व जनसहभागिता, सांस्कृतिक विविधता और उत्सवधर्मिता के साथ अपने चरम पर दिखाई दिया। प्रतिकूल मौसम और रुक-रुक कर होती बारिश भी लोगों के उत्साह को कम नहीं कर सकी। देर रात तक फिल्मी गीतों पर झूमते लोग और दिन में विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत मनोहारी सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने यह सिद्ध कर दिया कि कत्यूर की सांस्कृतिक चेतना हर परिस्थिति में प्रखर बनी रहती है।
स्टार नाईट में कुमाऊनी स्टार सिंगर माया उपाध्याय व राकेश खनवाल ने उपस्थित दर्शकों को झूमने पर रात भर मजबूर कर दिया। बच्चे बूढे जवान और ओरतो ने खूब थिरकते हुए स्टार नाइट का लुत्फ लिया।
महोत्सव का शुभारंभ एक भव्य सांस्कृतिक शोभायात्रा के साथ हुआ, जिसमें पूरे कत्यूर क्षेत्र की सांस्कृतिक, पौराणिक और ग्रामीण जीवन की झलक सजीव रूप में देखने को मिली। इस शोभायात्रा को दर्जा राज्यमंत्री शिव सिंह बिष्ट, जिला पंचायत अध्यक्ष शोभा आर्या ,नगर पंचायत अध्यक्ष भावना वर्मा और जिपंस भाष्कर बोरा ,जनार्दन लोहुमी ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने बैजनाथ मंदिर, कोट भ्रामरी मंदिर समेत कत्यूर घाटी की सांस्कृतिक विरासत को आकर्षक झांकियों के माध्यम से प्रस्तुत किया। पाये गांव की होली गायन पर आधारित झांकी ने दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित किया, जहां लोग स्वयं को थिरकने से रोक नहीं पाए।
महोत्सव के दौरान आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बच्चों की प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया। विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने अपनी कला और प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए दर्शकों से खूब तालियां बटोरीं। इस अवसर पर बीईओ कमलेश्वरी मेहता सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
महोत्सव के औपचारिक उद्घाटन अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि यह आयोजन उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति और परंपराओं का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने इसे सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित रखने और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम बताया। इस दौरान विधायक पार्वती दास, दर्जा मंत्री शिव सिंह बिष्ट, नगर पंचायत अध्यक्ष भावना वर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष शोभा आर्या, ब्लॉक प्रमुख किशन बोरा सहित अनेक जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
लोकसंस्कृति के विविध रंगों से सजे इस महोत्सव में संस्कृत नाटक, चांचरी, झोड़ा, भगनौल और लोकगीतों की मधुर प्रस्तुतियों ने वातावरण को मंत्रमुग्ध कर दिया। नैनीताल की बाल कलाकार अवर्णिका जोशी ने अपनी प्रस्तुति से विशेष सराहना प्राप्त की। सांस्कृतिक समन्वयक प्रवीन गुसाईं ने कहा कि यह मंच बाल कलाकारों के लिए अपनी प्रतिभा दिखाने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान कर रहा है।
रात्रिकालीन कार्यक्रमों में दिल्ली से आए कलाकारों—प्रदीप गुरंग, सुमित, विनीत और विपिन—ने फिल्मी गीतों की प्रस्तुति से दर्शकों को देर रात तक बांधे रखा। वहीं साहित्यिक गोष्ठियों में मोहन चंद जोशी, डॉ. प्रीतम नेगी ‘’, डॉ. हेम दुबे , गिरीश गौलोला, चंद्रशेखर बड़सीला, प्रेम भट्ट, आशा बुटोला , सुरेंद्र वर्मा, ओम प्रकाश फुलारा , सुरेंद्र वर्मा, प्रेमा भट्ट और जीवन दोसाद ने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज और व्यवस्था पर प्रभावशाली प्रहार किए, जिससे महोत्सव को वैचारिक ऊंचाई भी प्राप्त हुई।
बारिश के बावजूद मेले में लोगों की भारी भीड़ उमड़ी रही। झूले, खेल-खिलौने और स्थानीय उत्पादों की दुकानों में दिनभर रौनक बनी रही। पहली बार राजस्थान से आए ऊंट की सवारी लोगों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी, जिसका आनंद बच्चों से लेकर बड़ों तक ने उत्साहपूर्वक लिया।
महोत्सव में विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉल भी आकर्षण का केंद्र रहे, जहां लोगों को योजनाओं और सेवाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। वहीं सामाजिक सरोकार का परिचय देते हुए मंगल मूर्ति संगठन गरुड़ द्वारा समाजसेवी गोपाल सिंह नेगी के सहयोग से भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों स्कूली बच्चों और मेलार्थियों ने प्रसाद ग्रहण किया।
आध्यात्मिक आयाम में गंगा आरती और दीपोत्सव ने पूरे क्षेत्र को अलौकिक आभा से आलोकित कर दिया। गोमती तट से लेकर मंदिर परिसर तक दीपों की जगमगाहट ने वातावरण को दिव्यता से भर दिया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।
खेल प्रतियोगिताओं में भी युवाओं का उत्साह देखने को मिला, विशेष रूप से वॉलीबॉल प्रतियोगिता आकर्षण का केंद्र रही, जिसका शुभारंभ नगर पंचायत अध्यक्ष भावना वर्मा ने किया।
समग्र रूप में, कत्यूर महोत्सव ने इस वर्ष सांस्कृतिक, सामाजिक, साहित्यिक और आध्यात्मिक सभी आयामों में अपनी उत्कृष्टता का परिचय देते हुए यह सिद्ध कर दिया कि कत्यूर की लोकसंस्कृति आज भी जनमानस के हृदय में गहराई से रची-बसी है। यह महोत्सव न केवल परंपराओं का उत्सव है, बल्कि सामाजिक एकता, जनसहभागिता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का भी सशक्त प्रतीक बनकर उभरा है।