आस्था की राह पर पर्यावरण का संदेश, आदि कैलाश यात्रियों ने लिया हिमालय संरक्षण का संकल्प
पिथौरागढ़।। हिमालय की गोद में स्थित पवित्र आदि कैलाश यात्रा इस बार केवल आध्यात्मिक आस्था का ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के एक महत्वपूर्ण संदेश का भी माध्यम बनी। पिथौरागढ़ स्थित पर्यटक आवास गृह में कुमाऊँ मंडल विकास निगम द्वारा संचालित आदि कैलाश यात्रा के प्रथम चरण के अंतिम दल को हिमालय बचाओ अभियान से जोड़ते हुए एक प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कुमाऊँ मंडल विकास निगम के पूर्व प्रबंधक एवं राज्य निर्माण सेनानी दिनेश गुरु रानी ने अपने सतत पौधारोपण अभियान के 691वें दिन यात्रियों को उच्च हिमालयी क्षेत्र गुंजी और कालापानी में रोपण के लिए पौधे प्रदान किए। इस अवसर पर उन्होंने यात्रियों को हिमालय की संवेदनशील पारिस्थितिकी के संरक्षण का संदेश देते हुए पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान यात्रियों को शपथ दिलाई गई कि वे यात्रा मार्ग में पर्यावरण को प्रदूषित करने वाली किसी भी सामग्री का उपयोग नहीं करेंगे। साथ ही हिमालयी क्षेत्रों में बिखरे कूड़े-कचरे को एकत्रित कर धारचूला तक वापस लाकर उसके वैज्ञानिक निस्तारण में सहयोग करेंगे। यह पहल न केवल स्वच्छ हिमालय की दिशा में एक सार्थक प्रयास है, बल्कि पर्यावरणीय चेतना को जन-जन तक पहुंचाने का भी प्रभावी माध्यम बन रही है।
दिनेश गुरु रानी ने कहा कि हिमालय केवल एक भौगोलिक संरचना नहीं, बल्कि देश की प्राकृतिक धरोहर और करोड़ों लोगों के जीवन का आधार है। इसके संरक्षण के लिए प्रत्येक नागरिक का योगदान आवश्यक है। उन्होंने बताया कि विगत कई वर्षों से आदि कैलाश सहित विभिन्न हिमालयी यात्राओं में शामिल श्रद्धालुओं और पर्यटकों को पौधारोपण तथा स्वच्छता अभियानों से जोड़ा जा रहा है, जिसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं।
यात्रियों ने इस अभिनव पहल का स्वागत करते हुए कहा कि वे उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पौधारोपण करने के साथ-साथ यात्रा से लौटने के बाद अपने घरों और आसपास के क्षेत्रों में भी वृक्षारोपण करेंगे। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का संकल्प भी दोहराया।
कार्यक्रम में यात्रा दल के समन्वयक अर्जुन सिंह बोरा, प्रबंधक उमेश पांडे, हंसी रचना, नरेंद्र थापा, गोपाल, शेर सिंह, देवेंद्र सहित निगम के अनेक कर्मचारी उपस्थित रहे। यात्रा दल में देश के विभिन्न राज्यों से आए कुल 10 यात्री शामिल हैं, जो अब आदि कैलाश की पावन यात्रा के साथ हिमालय संरक्षण के संदेश को भी आगे बढ़ाएंगे।
