तीसरी संतान बनी जिला पंचायत सदस्यता पर संकट: कुन्दन राम अयोग्य घोषित, सीडीओ का बड़ा फैसला
बागेश्वर। उत्तराखण्ड पंचायतीराज व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों की पात्रता को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय सामने आया है। प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र-04 असों से निर्वाचित जिला पंचायत सदस्य कुन्दन राम को तीन जीवित जैविक संतानें होने के आधार पर सदस्य पद के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया है। मुख्य विकास अधिकारी एवं विहित प्राधिकारी आर.सी. तिवारी द्वारा शनिवार को जारी आदेश ने जनप्रतिनिधियों की वैधानिक जवाबदेही और निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता के महत्व को एक बार फिर रेखांकित किया है।
मामले की शुरुआत विभिन्न शिकायतों से हुई, जिनमें आरोप लगाया गया था कि निर्वाचन के दौरान कुन्दन राम ने अपनी तीसरी जीवित जैविक संतान से संबंधित तथ्य छिपाए। शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए निदेशक पंचायतीराज, उत्तराखण्ड के निर्देश पर विस्तृत जांच कराई गई। जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति में परियोजना निदेशक (डीआरडीए), जिला पंचायतराज अधिकारी तथा खण्ड विकास अधिकारी, बागेश्वर को शामिल किया गया।
समिति ने महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग, पोषण ट्रैकर एप, टीकाकरण पंजिकाओं, टेक होम राशन (टीएचआर) अभिलेखों, गोदनामा दस्तावेजों सहित विभिन्न स्रोतों से प्राप्त अभिलेखों का गहन परीक्षण किया। जांच के दौरान ऐसे पर्याप्त साक्ष्य प्राप्त हुए, जिनसे यह स्थापित हुआ कि कुन्दन राम की तीन जीवित जैविक संतानें हैं। विशेष रूप से 6 सितम्बर 2025 को पंजीकृत गोदनामे में स्वयं उनके द्वारा तीन जीवित जैविक संतानें होने का उल्लेख किया गया था। इसके अतिरिक्त महिला एवं बाल विकास तथा स्वास्थ्य विभाग के अभिलेखों में भी तीसरी संतान के जन्म एवं उसके पोषण संबंधी विवरण दर्ज पाए गए। जांच समिति के समक्ष उपस्थित होकर कुन्दन राम ने लिखित रूप में तीसरी संतान के जन्म की पुष्टि भी की।
उत्तराखण्ड पंचायतीराज (संशोधन) अध्यादेश, 2025 की धारा 90(1)(द) के अनुसार दो से अधिक जीवित जैविक संतान रखने वाला व्यक्ति जिला पंचायत सदस्य पद के लिए अयोग्य माना जाता है। इसी कानूनी प्रावधान के आलोक में जांच समिति की रिपोर्ट, उपलब्ध अभिलेखों और प्रस्तुत साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद विहित प्राधिकारी ने कुन्दन राम को जिला पंचायत सदस्य पद हेतु अयोग्य घोषित करने का निर्णय सुनाया।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निर्णय लेने से पूर्व संबंधित पक्ष को अपना पक्ष रखने का पूर्ण अवसर दिया गया तथा संपूर्ण प्रक्रिया विधिसम्मत और नियमानुसार संपन्न की गई। इस निर्णय के साथ ही पंचायतीराज संस्थाओं में निर्धारित पात्रता मानकों के अनुपालन को लेकर प्रशासन की सख्ती भी स्पष्ट रूप से सामने आई है।
हालांकि, आदेश के विरुद्ध संबंधित पक्ष को राहत का अवसर भी उपलब्ध है। नियमानुसार कुन्दन राम पत्र प्राप्ति की तिथि से 15 दिनों के भीतर कुमाऊँ मंडल के मण्डलायुक्त के समक्ष अपील प्रस्तुत कर सकते हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मामले में आगे कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है और क्या इस निर्णय को उच्च स्तर पर चुनौती दी जाती है।
