महासू धाम हनोल में लूंग चढ़ाने के साथ जागरा महापर्व शुरू
विकासनगर। जौनसार बावर के महासू धाम हनोल समेत कई अन्य मंदिरों में रविवार को लूंग (हरियाली) चढ़ाने के साथ ही आस्था का महापर्व जागरा (जागड़ा) शुरू हो गया। दो दिन के इस महापर्व के पहले दिन श्रद्धालुओं का भारी भीड़ जुटी। देव दर्शन के लिए आम और खास सभी एक ही कतार में लगे नजर आए। हनोल महासू मंदिर में जागरा मेले में देव दर्शनों के लिए रविवार सुबह से ही श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हो गया था। ब्रह्म मुहूर्त में पुजारी ने मंदिर के कपाट खोलकर देवता को लूंग चढ़ाई। जिसके बाद देवता के वजीर और स्याणाओं को लूंग भेंट की गई।शाम सात बजे तक मंदिर परिसर में करीब 20 हजार श्रद्धालु पहुंच गए थे। सभी श्रद्धालुओं ने रात्रि जागरण कर देवगीतों पर लोकनृत्य करते हुए देव आराधना की। महापर्व को भव्य और दिव्य बनाने के लिए मंदिर समिति, पर्यटन विभाग, संस्कृति विभाग, पुरातत्व विभाग और स्थानीय प्रशासन दो सप्ताह से तैयारियों में जुटे हुए थे। हरियाली तीज से शुरू होने वाले इस दो दिवसीय महापर्व में शामिल होने के लिए जौनसार बावर के साथ ही बंगाण, रवाईं, जौनपुर, यमुना घाटी के साथ ही हिमाचल प्रदेश के शिमला, सिरमौर जनपद से बड़ी संख्या में श्रद्धालु बौठा महासू महाराज के दरबार में पहुंचे। श्रद्धालुओं ने रात्रि जागरण कर देवता से परिवार और क्षेत्र के खुशहाली की मन्नत मांगी।
बारिश भी नहीं डिगा सकी महासू भक्तों की आस्था
आस्था और विश्वास के आगे बारिश और दुश्वारियां भी श्रद्धालुओं का हौसला नहीं डिगा सकीं। महासू धाम हनोल में रविवार को बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। मंदिर परिसर में जलभराव और कीचड़ के बीच भी श्रद्धालु बैठकर देव आराधना करते रहे। मंदिर तक पहुंचने के लिए कई स्थानों पर उन्हें कठिन रास्तों से गुजरना पड़ा, लेकिन प्रकृति की चुनौती भी उन्हें महासू धाम पहुंचने से नहीं रोक सकी। महासू धाम के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कई मार्ग बंद होने के बावजूद लोग कई किलोमीटर पैदल चलकर देव दर्शन के लिए पहुंचे।उत्तरकाशी जिले से आने वाले श्रद्धालुओं को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ी। छोटे बच्चे माता-पिता की गोद में बैठकर मंदिर पहुंचे, जबकि बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालु लाठी और बैसाखी के सहारे देव दर्शन के लिए पहुंचे। रविवार देर शाम तक मंदिर परिसर में श्रद्धा और आस्था का सैलाब उमड़ा रहा।
