September 28, 2026

उत्तराखंड में सुलभ शौचालय कर्मी भी बना रहा हैं डॉक्टर!!एमबीबीएस दाखिला फर्जीवाड़े में तहसील के शुलभ शौचालय कर्मी समेत दो गिरफ्तार


देहरादून ।  स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे के फर्जी प्रमाण पत्र से एमबीबीएस में दाखिला दिलाने वाले गिरोह दो और आरोपी एसआईटी ने गिरफ्तार कर लिए। इनमें एक तहसील परिसर बिल्डिंग के शुलभ शौचालय का कर्मचारी है। गिरफ्तारी के बाद तहसील में उनकी सेटिंग के साक्ष्य एसआईटी को मिल गए हैं। एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने बताया कि एसआईटी ने साक्ष्य जुटाने के बाद संजय कुमार मूल निवासी सारनाथ, बनारस, हाल निवासी डालनवाला और गिरीश सिंह मूल निवासी पिथौरागढ़, हाल निवासी गढ़ी कैंट को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में पता चला है कि आरोपी संजय दून तहसील परिसर की बिल्डिंग में ही सुलभ शौचालय का संचालन करता है। तहसील परिसर में उसकी दिनभर मौजूदगी रहती थी। पुलिस अब इस अहम एंगल पर जांच और पूछताछ कर रही है कि फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने के लिए संजय तहसील के किन अधिकारियों या कर्मचारियों के संपर्क में था। गिरीश देहरादून में मोबाइल-सिम बेचने की दुकान चलाता है। उसकी दुकान का पार्टनर कई सीएससी सेंटर संचालकों से जुड़ा है। इन दोनों ने ही स्वाति, परी और खुशी के फर्जी दस्तावेज तैयार किए थे।
मोबाइल में मिले एडिटिंग साफ्टवेयर
एसआईटी इंचार्ज एसपी देहात जया बलोनी ने बताया कि गिरफ्तार गिरीश के मोबाइल से पुलिस को एडिटिंग साफ्टवेयर मिले हैं। गिरोह के सदस्य जब छात्रों की जानकारी भेजते थे तो यह इसी सॉफ्टवेयर की मदद से आधार कार्ड समेत अन्य फर्जी दस्तावेज तैयार कर उससे स्थायी निवास और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करते। फर्जीवाड़े के लिए जरूरी ये जाली दस्तावेज उपलब्ध कराने में इनकी सबसे अहम भूमिका थी। दोनों आरोपी वर्ष 2007 से एक-दूसरे को जानते हैं और पूर्व में गिरफ्तार किए गए भोपाल के धीरज कुमार श्रीवास्तव के साथ-साथ गिरोह के एक अन्य फरार सदस्य के सीधे संपर्क में थे।
क्लेमनटाउन थाने का केस अब भी अनसुलझा
इस फर्जीवाड़े में बीते 13 सितंबर को रायपुर और क्लेमनटाउन थानों में अलग-अलग मुकदमे दर्ज हुए थे। एसआईटी का एक्शन अब तक केवल रायपुर थाने में दर्ज मुकदमे से जुड़े गिरोह तक ही सीमित है। सभी पांच गिरफ्तारियां इसी केस में हुई हैं। वहीं, क्लेमनटाउन थाने में दर्ज केस में पुलिस के हाथ अभी तक पूरी तरह खाली हैं। इस मुकदमे में पुलिस किसी भी आरोपी को ट्रेस नहीं कर पाई है।

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