October 4, 2026

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देहरादून ।  शनिवार को गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर में 120वें अखिल भारतीय किसान मेला एवं कृषि प्रदर्शनी का शुभारंभ राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) द्वारा किया गया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी, विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. शिवेन्द्र कुमार कश्यप, निदेशक शोध डॉ. एस. के. वर्मा एवं निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. जितेन्द्र क्वात्रा उपस्थित रहे। मेले के उद्घाटन के पश्चात विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि को विभिन्न महाविद्यालयों, नवाचार आधारित स्टॉल और स्वयं सहायता समूह द्वारा लगाये गये विभिन्न उत्पादों के स्टॉल का अवलोकन कराया गया।
  इस अवसर पर राज्यपाल ने 120वें अखिल भारतीय किसान मेले एवं कृषि उद्योग प्रदर्शनी के उद्घाटन अवसर पर कहा कि 21वीं सदी की कृषि को नई दिशा देने के लिए तकनीक, अनुसंधान और नवाचार को किसान के खेत तक पहुंचाना होगा। उन्होंने कहा कि विकसित मारत-2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है और देश को कृषि उत्पादकता के साथ किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष ध्यान देना होगा। राज्यपाल ने पंतनगर विश्वविद्यालय की इस भूमि को नमन करते हुए कहा कि जिस क्षेत्र को कभी जंगलों और वन्यजीवों से कृषि क्षेत्र में परिवर्तित किया गया, उसमें किसानों और पूर्वजों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने इस परिवर्तन के लिए उन सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया, जिन्होंने अपनी मेहनत से इस क्षेत्र को कृषि की भूमि बनाया।
  राज्यपाल ने कहा कि 120वें किसान मेले के पीछे 119 आयोजनों का अनुभव और समृद्ध परंपरा जुड़ी हुई है। उन्होंने मेले में किसानों, विद्यार्थियों और शोधार्थियों की व्यापक भागीदारी को उत्साहजनक बताते हुए कहा कि यह आयोजन वैज्ञानिक, किसान, युवा, उद्यमिता और नई तकनीक को एक मंच पर जोड़ने का महत्वपूर्ण अवसर है। राज्यपाल ने कहा कि पंतनगर विश्वविद्यालय ने देश को खाद्य उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। अब समय आ गया है कि विश्वविद्यालय कृषि के माध्यम से ‘फूड सरप्लस’ के बाद ‘इनकम सरप्लस’ की दिशा में कार्य करे।
  राज्यपाल ने कृषि क्षेत्र में तीन प्रमुख क्रांतियों की आवश्यकता बताते हुए हनी क्रांति, अरोमा क्राति और श्रीअन्न (मिलेट्स) क्रांति पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में प्राकृतिक शहद, सुगंधित एवं औषधीय फसलों तथा मिलेट्स के क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं है और राज्य इन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने किसानों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर तथा अन्य आधुनिक तकनीकों को अपनाने का आहवान किया।