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November 8, 2026

वन अधिकार कानून को मिटाने की साजिश हो रहीः अशोक चैधरी

देहरादून,  (  आखरीआंख अखिल भारतीय वन जन श्रमजीवी यूनियन के अध्यक्ष अशोक चैधरी ने वन क्षेत्र से वनाश्रित समुदाय के असंवैधानिक तरीके से विस्थापन का विरोध करत हुए कहा कि तथाकथित वन्यजीव प्रेमियों व वन अधिकारियों के द्वारा लाखों वन आश्रित समुदाय को बेदखल करने की साजिश की जा रही है जिसकी यूनियन कठोर शब्दों में निंदा करती है।
उत्तरांचल प्रेस क्लब में आयेजित पत्रकार वार्ता में यूनियन के अशोक चैधरी ने कहा कि 13 फरवरी को वाइल्डलाइफ फस्ट, नेचर कंजर्वेशन सोसाइटी और टाइगर रिसर्च व कंजर्वेशन टेस्ट द्वारा दी गई याचिका के ऊपर उच्चतम न्यायालय ने लाखों वन आश्रित समुदाय को जंगल क्षेत्र से विस्थापित करने का फैसला सुनाया। उन्होंने कहा कि तथाकथित वन्यजीव प्रेमियों व वन अधिकारियों के द्वारा लाखों वन आश्रित समुदाय को बेदखल करने की साजिश की जा रही है। अशोक चैधरी ने कहा कि एकतरफा फैसला जो स्पष्ट रूप से जाहिर करता है कि देश में वन अधिकार कानून को मिटाने की साजिश हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकार इस त्रासदी रोेकने लिए वन अधिकार कानून में दी गई जिम्मेदारी को निभाते हुए अध्यादेश जारी करें ताकि विस्थापन की प्रक्रिया पर रोक लगे। सुप्रीम कोल्ट के फैसले के विरूद्व पुनर्विचार याचिका दाखिल करें। वन विभाग द्वारा चलाए जा रहे विस्थापन की प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाए। वनाधिकार कानून के तहत आ रही अड़चनों को दूर करने हेतु तत्काल स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए जाएं। वन अधिकार कानून 2006 के प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। प्रेस वार्ता में विपिन गैरोला, रोमा, तरूण जोशी, मुस्तफा चैपडा, अशोक चैधरी, गोपाल लोधियाल, चासूराम, मो0 साची आदि उपस्थित रहे।

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