April 21, 2026

हरिद्वार लोस सीटः यहां से कोई दोबारा सांसद नहीं बन पाता

देहरादून, ( आखरीआंख ) हरिद्वार लोकसभा क्षेत्र के बारे में यह मिथक माना जाता है कि यहां जिसे सांसद चुन लिया जाता है, वो दोबारा सांसद नहीं बन पाता। हालांकि हरिद्वार सीट से लगातार तीन चुनाव जीतकर संसद पहुंचे भाजपा  सांसद हरपाल सिंह साथी ने इस मिथक को गलत साबित किया। सियासी जानकार हरपाल को इसका अपवाद मानते हैं। हरिद्वार ही वो सीट है जहां बसपा की सुप्रीमो बनने से पहले मायावती ने लगातार दो चुनाव हारे। वे 1989 और 1991 में इस सीट पर बसपा से चुनाव लड़ीं और तीसरे स्थान पर रहीं।
कांग्रेस और भाजपा की चुनावी जंग का अखाड़ा रही इस सीट पर कांग्रेस चार बार चुनाव जीती, जबकि भाजपा पांच बार विजयी रही। 1971 से अस्तित्व में आई ये सीट 2004 के लोकसभा चुनाव तक अनुसूचित जाति वर्ग के उम्मीदवार के लिए सुरक्षित रही। 2009 के चुनाव में ये सीट सामान्य हो गई। 1991 तक इस सीट पर ये मिथक भी रहा कि यहां के मतदाता एक बार जिस प्रत्याशी को चुनते हैं, दूसरी बार वो सांसद नहीं बन पाता। 1971 में कांग्रेस के मुल्की राज चुने गए तो 1977 में बीएलडी के भगवानदास ने चुनाव जीता था। 1980 जेएनपी (एस) जगपाल सिंह सांसद बने तो 1984 में वोटरों ने कांग्रेस के सुंदरलाल को चुनकर भेजा। 1989 में कांग्रेस के जगपाल सिंह चुने गए तो 1991 में भाजपा के रामसिंह निर्वाचित हुए। लेकिन 1996, 1998 और 1999 में लगातार तीन लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद हरपाल सिंह साथी ने इस मिथक गलत साबित किया। 2004 में इस सीट पर समाजवादी पार्टी के राजेंद्र कुमार बॉडी सांसद चुने गए। 2009 के चुनाव आए तो हरिद्वार के मतदाताओं ने कांग्रेस के हरीश रावत को संसद में भेजा। 2014 के चुनाव में उन्होंने भाजपा के डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक को चुना। राज्य गठन के बाद एक बार फिर इस सीट पर मिथक के चर्चे हैं।