January 30, 2026

कानून को आईना दिखाते अपराधी

( अर्जुन राणा )
उत्तर प्रदेश की उन्नाव जेल में संगीन अपराधों में बंद अपराधियों द्वारा जेल में दारू-पार्टी करते हुए हथियार लहराने का मामला हो या फिर मध्यप्रदेश में भाजपा विधायक आकाश विजयवर्गीय द्वारा बैट से नगर निगम अधिकारी की पिटाई का मामला हो, निष्कर्ष यही है कि जिनका दायित्व कानून व्यवस्था को बनाये रखना है, वे ही कानून तुड़वाते-तोड़ते नजर आ रहे हैं। लुधियाना सेंट्रल जेल में एक हवालाती की मौत के बाद उग्र कैदियों द्वारा हिंसा का तांडव व गोलीबारी की घटना फिर बताती है कि जेलों में जेल अधिकारियों की नाकामी से जंगलराज कायम है। अब चाहे फरीदाबाद में हरियाणा कांग्रेस प्रवक्ता विकास चौधरी की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या करने की घटना हो या फिर सोनीपत में एक महीने से कम समय में ग्यारह हत्याएं होने का आंकड़ा हो, सब घटनाएं कानून के रखवालों की नाकामी ही दर्शाती हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि अपनी नाकामी छिपाने के लिए जिमेदार अधिकारी जो तर्क देते हैं, वे गले नहीं उतरते। उन्नाव जेल के जेलर अपराधियों की पार्टी व हथियार लहराने पर सवाल पूछे जाने पर बेहूदा जवाब देते हैं कि बोतल में शराब नहीं, तेल था और पिस्टल गत्ते की बनायी गयी थी। अब सवाल उठता है जब जेल में गत्ते की पिस्टल बनायी गई तो क्रॉप्ट का सामान भी तो बाहर से ही मंगवाया गया होगा। एक बात तो साफ है कि जेल व्यवस्था में काली भेड़ें मौजूद हैं, जो अपराधियों के लिये शराब-कबाब जेल के भीतर मुहैया करा रही हैं। आखिर हथियार जेल के भीतर अपराधियों तक कैसे पहुंचे जेल में वह मोबाइल अपराधियों तक कैसे पहुंचा, जिसके जरिये जेल में हुई पार्टी का वीडियो बनाया गया आखिर जेल के भीतर से अपराधी कैसे सरकार को चुनौती दे सकते हैं जाहिर-सी बात है कि विभाग के ही कुछ लोग मोटी कमाई के लालच में जेल के भीतर अपराधियों के लिये पार्टी आयोजित करने में मदद करते हैं।
जेलर महोदय से पूछा जाना चाहिए कि यदि जेल में कुछ हुआ ही नहीं तो घटनाक्रम के तुरंत बाद उत्तर प्रदेश शासन ने बड़े पैमाने पर जेल प्रशासन में फेरबदल क्यों किये भले ही जेल विभाग दावा करता रहे कि तबादले शासन की स्थानांतरण नीति व प्रशासनिक आधार पर किये गये हैं, मगर सच यही है कि राय में उन्नाव समेत 21 जेलरों और 44 डिप्टी जेलरों के तबादले हुए हैं। सवाल राय सरकार पर भी उठता है कि क्यों किसी घटनाक्रम के सामने आने के बाद तंत्र जागता है क्या सरकार का अपना खुफिया तंत्र नहीं है जो जेलों के भीतर के काले कारनामों को समय रहते नाकाम कर सके। यह एक खतरनाक चूक है जो यह भी आशंका व्यक्त करती है कि अपराधी जेल के भीतर से भी अपना काला साम्राय चला सकते हैं। इसी तरह फरीदाबाद में कांग्रेस प्रवक्ता की हत्या पर यह दलील कि उसका आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। क्या ऐसा होने पर उसकी हत्या को जायज मान लिया जाना चाहिए क्या यह कानून व्यवस्था का प्रहसन नहीं है ये हालात हमारी बद से बदतर होती कानून व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कम करते हैं—वह भी भाजपा के सुशासन व कानून व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त करने के दावों के बीच। यही स्थिति कमोबेश मध्यप्रदेश के इंदौर में भाजपा विधायक आकाश विजयवर्गीय के बारे में कही जा सकती है कि कानून बनाने की बिरादरी के लोग क्यों कानून तोडऩेे लगे एक अधिकारी की भी अपनी गरिमा व मानव अधिकार होते हैं, कैसे कोई जिमेदार व्यक्ति उसकी बैट से पिटाई कर सकता है यदि विधायक ही कानून तोडऩे लगेेंगे तो आम आदमी से फिर क्या उमीद की जाये कहा जा रहा है कि पार्टी आलाकमान ने विधायक के बाबत रिपोर्ट मांगी है। उमीद की जानी चाहिए कि न्यायालय की तरह पार्टी आलाकमान भी विधायक पर सती दिखाएगा।
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