बागेश्वर में प्रेस दिवस पर गोष्टी आयोजित
बागेश्वर राष्ट्रीय प्रेस दिवस के अवसर पर आज तहसील सभाागर बागेश्वर में प्रभारी जिलाधिकारी राहुल कुमार गोयल की अध्यक्षता में प्रेस दिवस का अयोजन किया गया। जिसमें रिर्पोंटिग व्याख्या (इंटरप्रिटेशन) एक यात्रा विषय पर विचार गोष्ठी का अयोजन किया गया। राष्ट्रीय प्रेस दिवस के अवसर पर प्रभारी जिलाधिकारी राहुल कुमार गोयल ने कहा कि भारत में प्रेस की स्वतंत्रता एवं पत्रकारिता में उच्च आदर्श कायम करने के उद्देश्य से एक प्रेस परिषद की कल्पना की थी, जिसके परिणाम स्वरूप 04 जुलार्इ, 1966 को भारत में प्रेस परिषद की स्थापना की गयी। जिसने 16 नवम्बर, 1966 से अपना विधिवत कार्य शुरू किया। तब से लेकर आज तक प्रति वर्ष 16 नवम्बर को राष्ट्रीय प्रेस दिवस के रूप में बनाया जाता हैं। उन्होंने कहा कि विश्व में लगभग आज 50 देशों में प्रेस परिषद या मीडिया परिषद हैं। जो राष्ट्रीय प्रेस की स्वतंत्रता एवं जिम्मेदारियों की ओर हमारा ध्यान आकर्षित करता है। उन्होंने कहा कि मीडिया को समाज का दर्पण एवं दीपक दोनों माना जाता हैं इनमें जो समाचार मीडिया है, चाहे वह समाचार पत्र हो या समाचार चैंनल उन्हें मूलत: समाज का दर्पण माना जाता हैं, तथा दर्पण का काम है समतल दर्पण की तरह काम करना, ताकि वह समाज की हू-ब-हू तस्वीर समाज के सामने पेश कर सकें। उन्होंने कहा कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ हैं जिसे निष्पक्ष, स्वतंत्र एवं पारदर्शिता से समाज में घटित घटना को प्रकाशित करना हैं। इस अवसर पर उपजिलाधिकारी बागेश्वर राकेश चन्द्र तिवारी ने कहा कि पत्रकारिता सामाजिक सरोकरों तथा सार्वजनिक हित से पत्रकारिता बनती हैं सामाजिक सरोकरों को व्यवस्था की दहलीज तक पहुंचने और प्रशासन की जनहित कार्यो, नीतियों एवं योजनओं को समाज के सबसे नीचले तबके तक ले जाने के दायित्व का निर्वाह ही सार्थक पत्रकारिता हैं। पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा पाया (स्तम्भ) भी कहा जाता हैं, पत्रकारिता ने लोकतंत्र में यह महत्वपूर्ण स्थान बनने आप नही हासिल किया हैं, बल्कि सामाजिक सरोकारों के प्रति पत्रकारिता के दायित्वों के महत्व को देखते हुए समाज ने ही दर्जा दिया हैं। सार्थक पत्रकारिता का उद्देश्य यह होना चाहिए कि वह प्रशासन और समाज के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी की भूमिका अपनायें।इस अवसर पर अध्यक्ष प्रेस क्लब/पत्रकार चंदन सिंह परिहार ने कहा कि राष्टीय प्रेस दिवस के अवसर पर सभी पत्रकारिता से जुडे लोगों को अपने मूल्यों और आदर्शो की सीमा रेखा को कायम रखते हुए कार्य करना होगा, और कहा कि राष्ट्रीय प्रेस दिवस पत्रकारों को शसक्त बनाने के उद्देश्य से स्वंय को फिर से समर्पित करने का अवसर प्रदान करता है। पत्रकार जगदीश उपाध्याय ने कहा कि पूराने दौर में समाचार पत्रों में खबरो के प्रकाशन के लिए केवल समित संसाधनों के माध्यम से खबरो का प्रेषण किया जाता था जो आज के दौर में यह व्यवस्था बदल गयी हैं संचार क्रांति के इस दौर में आज इंटरनेट व अनेक माध्यमों से खबरों का प्रेषण किया जा रहा हैं, जिसमें सोशल मीडिया भी इस क्षेत्र में काफी सक्रीय हो गया हैं। पत्रकार संजय शाह जगाती ने कहा कि पत्रकरों को हमेशा जनसरोकरों को लेकर निष्पक्ष एवं स्वतंत्र पत्रकारिता करनी चाहिए। पत्रकार धनश्याम जोशी ने कहा कि भारत देश में मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कहा जाता है, यह दिन भारत में एक स्वतंत्र और जिम्मेदार प्रेस की मौजूदगी का प्रतीक है। पत्रकार हरीश नगरकोटी ने कहा कि किसी भी देश को मजबूर करने के लिए पत्रकारिता का महत्पूर्ण योगदान रहता है क्योकि पत्रकारिता के माध्यम से जनता को जागरूक किया जाता हैं। पत्रकार अशोक लोहनी ने कहा कि प्रजातंत्र में पत्रकारिता का कार्य सार्वभौमिक व बहुआयामी है। पत्रकार का कार्य मात्र घटनाओं का संकलन करना ही नही बल्कि समाज में फैली तमाम समस्याओं का अध्ययन कर उन्हें आगे लाना भी हैं।इस अवसर पर जिला पूर्ति अधिकारी अरूण कुमार वर्मा, जिला सूचना अधिकारी रती लाल शाह, पत्रकार हिंमाशु सगटा, लोकपाल सिंह कोरंगा, जगदीश चन्द्र उपाध्याय, मदन सिंह बिष्ट, महीप पांडे, गोविंद सिंह मेहता, योगेश नगरकोटी, सुन्दर सुरकाली, दीपक पाठक, उमेश सिंह मेहता, हिंमाशु गढिया, नेरन्द्र सिंह विष्ट सहित सूचना विभाग के कर्मचारी मौजूद रहें।
