बागेश्वर में धोखाधड़ी करने वाले को सात साल का कठोर करावास
बागेश्वर। निचली अदालत से दोषमुक्त करार दिए गए धोखाधड़ी के अभियुक्तों को अपर सत्र न्यायाधीश कुलदीप शर्मा ने दोषसिद्ध किया है। उन्होंने मुय अभियुक्त को सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही अपराध में साथ देने वाले अभियुक्त को भी तीन साल का कारावास सुनाया। अभियुक्तों पर फर्जी दस्तावेज बनाकर धोखाधड़ी करने का आरोप था। मामले के मुय आरोपी बिलौना निवासी वंशीधर शर्मा उर्फ अशोक शर्मा पुत्र शिवदत्त शर्मा के खिलाफ अशोक खेतवाल ने 22 दिसंबर 2018 को कोतवाली में मामला दर्ज कराया था। जिसमें उसने बताया कि आरोपी ने धोखे से उसके नाम पर इलाहाबाद बैंक से आठ लाख रुपये का लोन लिया है। आरोपी ने गणपति ट्रेडर्स पिंडारी रोड नाम से 11 लाख आठ हजार रुपये का कोटेशन बनाया। जिसमें फर्जी साइन कर उसके नाम से लोन लिया। इस खाते को वह स्वयं संचालित करता रहा। तहरीर के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 420, 467, 468 और 471 में मामला दर्ज किया। पुलिस जांच के बाद आरोपी को जेल भेज दिया गया। जांच के दौरान पुलिस को मामले में एक और आरोपी प्रताप सिंह तड़ागी पुत्र गुमान सिंह ग्राम पुड़कूनी की भूमिका का पता चला। जिसके साथ मिलकर शर्मा ने मामले को अंजाम तक पहुंचाया था। जांच अधिकारी एसआई मदन लाल ने उसके खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471 और 120 बी में मामला दर्ज कर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किए। निचली अदालत ने उस पर विचार कर दोनों आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया। जिसके खिलाफ सरकार ने अपर सत्र न्यायालय में अपील दायर की। शुक्रवार को अपर सत्र न्यायाधीश ने अपना फैसला सुनाते हुए दोनों को दोषसिद्ध करते हुए सजा का ऐलान किया। मामले में राय सरकार की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता चंचल सिंह पपोला और रिपोर्टर अशोक खेतवाल की ओर से अधिवक्ता नरेंद्र सिंह कोरंगा ने मामले की पैरवी की।
