January 30, 2026

तकनीक : कुविवि बना रहा प्लास्टिक से ग्राफीन  

नैनीताल। कुमाऊं विवि में रसायन विज्ञान विभाग के अधीन संचालित नैनोसाइंस एंड नैनोटेक्नोलॉजी सेंटर में शोध के जरिए तैयार की गई प्लास्टिक से ग्राफीन बनाने की तकनीक का सोमवार को हस्तांतरण कर दिया गया है। इस संबंध में विश्वद्यालय का राष्ट्रीय अनुसंधान एवं विकास परिषद (एनआरटीसी) नई दिल्ली, एनएमएचएस कोसी कटारमल अल्मोड़ा तथा हेसक्रॉप प्राइवेट लिमिटेड के बीच करार किया गया। इसके लिए ढाई करोड़ रुपये की राशि जारी हो गई है। बता दें कि विवि के रसायन विज्ञान विभाग के तहत स्थापित प्रो. राजेंद्र सिंह नैनोसाइंस एवं नैनोटेक्नोलॉजी सेंटर के प्रभारी वरिष्ठ प्रो. नंद गोपाल साहू के निर्देशन में शोधार्थियों ने एक विशेष तकनीक विकसित की है। इसमें व्यर्थ प्लास्टिक से कार्बन के महत्वपूर्ण अपरूप सरल तथा सस्ती पद्धति से ग्राफीन बनाई जा रही है। विवि में पहली बार कुलपति प्रो. केएस राणा की अध्यक्षता में इस तकनीक का हस्तांतरण किया गया। यह तकनीक न केवल एक नए कीर्तिमान के रूप में स्थान बनाएगी, जबकि इससे भविष्य में छात्रों और शोधार्थियों के लिए भी नए आयाम स्थापित होंगे। इस तकनीक के हस्तांतरण के बाद व्यर्थ प्लास्टिक कचरे से बहुमूल्य ग्राफीन का उत्पादन किया जा सकेगा। वहीं इससे पर्यावरण के संरक्षण तथा प्लास्टिक कचरे से निजात मिलेगा। कुलपति प्रो. केएस राणा, वित्त अधिकारी दिनेश राणा, उप कुल सचिव केआर भट्ट, रूसा के नोडल अधिकारी प्रो. अतुल जोशी, रसायन विज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रो. एबी मेलकानी, एनआरडीसी के प्रबंध संचालक एच पुरूषोतम, एनआरडीसी के चीफ डीसी जोशी, अश्विनी कुमार, आईक्यूएसी के निदेशक प्रो. राजीव उपाध्याय, एनएमएचएस के नोडल अधिकारी कीरित कुमार, डॉ. महेंद्र राणा, कोली साहू, हेसक्रॉप कंपनी के मारूति साह, अक्षत साह, एई संजय पंत, विधान चौधरी आदि मौजूद रहे।
क्या है ग्राफीन – ग्राफीन 21वीं सदी का बहुपयोगी पदार्थ है। जिसका उपयोग उर्जा के क्षेत्र में सोलर सैल, यूल सैल, बैटरी, सुपर कैपिस्टर व दवाई तथा जल शुद्धिकरण समेत अन्य क्षेत्रों में किया जाता है। सौ किलोग्राम प्लास्टिक से करीब 12 किलो ग्राफीन तैयार किया जा सकता है। जिसकी कीमत 40 हजार से एक लाख रुपये प्रति किलो होगी।
इन शोधार्थियों की टीम तकनीक में शामिल- मनोज, मयंक पाठक, अनीता राणा, हिमानी तिवारी, गौरव, नेहा कार्की, चेतना तिवारी, मोनिका, भास्कर बोरा, सुनील, राजेंद्र कुमार, दीवान सिंह, संदीप।
शोधार्थियों ने की बेहतर लैब की मांग – शोधार्थियों ने कुलपति प्रो. राणा से नैनो साइंस एंड नैनो टेक्नोलॉजी सेंटर में बेहतर लैब बनाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि शोध करने वाले छात्र देर रात्रि तक यहां काम करते हैं, खासकर वर्षाकाल व जाड़ों में उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इस पर कुलपति ने जल्द ही एडवांस लैब बनाने का भरोसा दिया।
शहर को कूड़े से मुक्त करने की भी पहल- नैनीताल शहर को कूड़े से मुक्त करने की भी पहल की जा रही है। यहां एकत्रित कूड़े से डीजल, कैरोसीन व एलपीजी गैस बनाई जाएगी। साढ़े तीन करोड़ की राशि से नैनीताल के नारायण नगर क्षेत्र में प्लांट बनाने की प्रक्रिया की जा रही है। पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा राष्ट्रीय हिमालय अध्ययन मिशन की ओर से अमृतम प्रोजेक्ट के तहत कुविवि के नैनो साइंस एंड नैनो टेक्नोलॉजी सेंटर व नगर पालिका परिषद के संयुक्त प्रोजेक्ट बनाया गया है। प्रो. नंद गोपाल साहू ने इसपर काम विशेष काम किया है।

You may have missed