July 24, 2024

दून के संगठनों ने की लापता हवलदार राजेंद्र नेगी की सकुशल वापसी की मांग 

देहरादून। भारतीय सेना के लापता जवान हवलदार राजेंद्र सिंह नेगी की सकुशल वापसी के लिए गैरसैंण राजधानी निर्माण अभियान की ओर से गुरुवार को परेड ग्राउंड धरना स्थल पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। चर्चा और बैठक कार्यक्रम के दौरान विभिन्न वक्ताओं ने कहा कि हवलदार राजेंद्र सिंह नेगी के परिजन पीड़ा में जी रहे हैं। उत्तराखंड का जनमानस अपने इस लाल की सलामती को लेकर बेहद चिंतित है। हवलदार राजेंद्र सिंह नेगी की जानकारी और सुध लेने के लिए प्रशासन के माध्यम भारत सरकार को एक ज्ञापन भी प्रेषित किया। ज्ञापन प्रेषित करने के लिए बड़ी संया में विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि गैरसैण राजधानी निर्माण अभियान के मंच पर एकत्रित हुए। यहां सैनिक की सकुशल वापसी के लिए गंभीर मंथन किया। प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री को भेजे ज्ञापन के माध्यम मांग की गई कि भारतीय सेना के 18 गढ़वाल के हवलदार राजेंद्र सिंह नेगी विगत 8 जनवरी को अचानक लापता हो गए। अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है। जिसके चलते उनका परिवार मानसिक रूप से बेहद प्रताडि़त हो रहा है। अविलंब हवलदार राजेंद्र सिंह नेगी को ढूंढ निकाला जाए। प्रशासन की ओर से नगर मजिस्ट्रेट मथुरा दत्त जोशी ने ज्ञापन प्राप्त किया।
इन्होंने सौंपा ज्ञापन – ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने वालों में पूर्व आईएएस सुरेंद्र सिंह पांगति, रघुवीर सिंह बिष्ट, दौलत कुंवर, लक्ष्मी प्रसाद थपलियाल, मनोज ध्यानी, विजय सिंह रावत, कमला पंत, निर्मला बिष्ट, रविंद्र जुगरान, मदन सिंह भंडारी, पुरुषोत्तम भट्ट, प्रकाश चंद्र थपलियाल, चंद्र मोहन जली, पुष्कर नेगी, अनिल रावत, सुमन डोभाल काला, प्रकाश चंद्र गौड़, रविंद्र प्रधान, सुशील कैंतुरा, गणेश धामी, वीरेंद्र सिंह रावत, प्रशांत बड़ोनी, रोहित ध्यानी, अंकित बिष्ट सहित कई लोग शामिल रहे। इससे पहले गैरसैंण राजधानी निर्माण अभियान की सभा में हवलदार राजेंद्र सिंह नेगी की कुशल वापसी के लिए प्रार्थना भी की गई। इस दौरान कार्यक्रम की अध्यक्षता रघुवीर सिंह बिष्ट और संचालन युवा नेता मदन सिंह भंडारी, सुशील कैंथुरा ने संयुक्त रूप से किया।
ये संगठन रहे मौजूद – कार्यक्रम के दौरान गैरसैंण राजधानी निर्माण अभियान के अतिरिक्त उत्तराखंड महिला मंच, संवैधानिक अधिकार मंच, देवभूमि ई-रिक्शा यूनियन, युवा आह्वान, प्राऊड पहाड़ी, उत्तराखंड जनवादी महिला समिति, जन संवाद, अपना परिवार, नेताजी संघर्ष समिति, उत्तराखंड बेरोजगार संघ और उत्तराखंड विकलांग संघ आदि मौजूद रहे।