पंचायत भवनों में किया जाएगा प्रवासियों को क्वारंटाइन
देहरादून। लॉकडाउन के तीसरे चरण से ठीक पहले गांवों में लौट रहे हजारों प्रवासियों को जरूरत पडऩे पंचायत भवन या पंचायत की सीमा में पडऩे वाले स्कूलों में टिकाया जा सकता है। साथ ही विभाग प्रधानों की आकस्मिक खर्च की सीमा भी बढाने पर विचार कर रहा है। हजारों प्रवासियों की अपने गांव वापसी को देखते हुए पंचायतीराज विभाग सतर्क हो गया है। दरअसल कोरोना संक्रमण के चलते कई जगह प्रधान पहले ही बाहर से आने वाले लोगों पर एतराज जता रहे हैं।
ऐसे में यदि जरूरत हुई तो प्रवासियों को क्वारंटीन अवधि में गांव के निकट किसी सरकारी भवन (पंचायत भवन, स्कूल आदि) में टिकाया जा सकता है। विभाग ने इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया है। इन लोगों को खाना उनके परिजन ही घर से लाकर देंगे, यदि किसी का परिजन गांव में नहीं है तो ऐसी स्थिति में ग्राम प्रधान उनके लिए खाने का इंतजाम करेंगे। सरकार आपदा प्रबंधन बजट से बाद में इसका भुगतान करेगी। ग्राम पंचायत विकास अधिकारी और ग्राम प्रधान को इनकी निगरानी की जिमेदारी दी जाएगी। जरूरत पडऩे पर विभाग ग्राम प्रधानों को मिलने वाले आकस्मिक व्यय की सीमा भी आठ प्रतिशत से बढाने को तैयार है। अभी यह सीमा ग्राम पंचायत को मिलने वाले कुल सालाना बजट का आठ प्रतिशत है। सरकारी भवन दूर तो होम क्वारंटाइन निदेशक पंचायती राज ने बताया कि सभी पंचायतों में पंचायत भवन या स्कूल नहीं है। ऐसे में यदि कहीं क्वारंटाइन सेंटर बनाने में दिक्कत आती है तो वहां, प्रवासी होम क्वारंटाइन में रहेंगे। प्रधान इसकी निगरानी करेंगे।
आपदा प्रबंधन विभाग ने हमें प्रवासियों को ठहराने के लिए व्यवस्था करने को कहा है। विभाग सभी जिला पंचायतीराज अधिकारियों के जरिए प्रधानों को इस काम में सहयोग के लिए लिख रहा है। – हरिचंद्र सेमवाल, निदेशक और अपर सचिव पंचायतीराज
