March 18, 2026

जागरूकता से ही रुकेगा मानव और वन्यजीव संघर्ष: धरम सिंह मीणा

ऋषिकेश। वन विभाग भागीरथी वृत्त की मानव और वन्यजीव संघर्ष कम करने, वन पंचायत प्रबंधन और हिंसक जीवों के सुरक्षित रेस्क्यू के लिए तीन दिवसीय कार्यशाला शुरू हुई। वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट ने वनाधिकारियों को रेस्क्यू के गुर सिखाए। मौके पर वन सरंक्षक डा. धीरज पांडेय ने कहा कि जागरूकता से ही मानव और वन्यजीव संघर्ष रुक सकता है। इस पर कार्य करना होगा। सोमवार को लीसा डिपो रोड स्थित वन विभाग कार्यालय में कार्यशाला के पहले दिन हिंसक जीव गुलदार, बाघ की प्रवृत्ति, जनजागरूकता, रेस्क्यू आदि विषयों पर चर्चा की गई। साथ ही कार्यशाला में टिहरी, नरेंद्रनगर, उत्तरकाशी, चंबा आदि रेंज से आए वनाधिकारियों से आबादी में वन्यजीवों की घुसपैठ रोकने, मानव संघर्ष कम करने आदि पर सुझाव भी मांगे। वन संरक्षक डा. धीरज पांडेय ने रेंज अधिकारियों से ग्रामीणों से तालमेल बनाने और गुलदार, बाघ के हमले रोकने को जनजागरूकता अभियान चलाने की बात कही। नरेंद्रनगर वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी धर्म सिंह मीणा ने कहा कि किस क्षेत्र में लैपर्ड सक्रिय है, क्या कारण है इसकी जानकारी जुटाकर समाधान करें। जानमाल का नुकसान रोकने के लिए लोगों को जागरूक करें। शाम ढलने के बाद घर से अकेले बाहर नहीं निकले। जागरूकता से ही मानव और वन्यजीव संघर्ष को कम किया जा सकता है। मौके पर वनक्षेत्राधिकारी बीपी बधानी, उपवन क्षेत्राधिकारी हुकम दत्त बिजल्वाण, वनक्षेत्राधिकारी स्पर्श काला, वन दरोगा रमेश थपलियाल, जसवंत पंवार, सतपाल चौहान आदि अधिकारी मौजूद रहे।
रेस्क्यू के गुर सिखाए: कार्यशाला में पशु चिकित्साधिकारी डा. अमित ध्यानी और महाराष्ट से आए वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट विवेक पगारे ने गुलदार और बाघ के सुरक्षित रेस्क्यू करने के गुर वनाधिकारियों को सिखाए। बताया कि रेस्क्यू ऐसा होना चाहिए जिसमें शोर नहीं हो। भीड़ नहीं होने दें। पशु चिकित्साधिकारी ने गुलदार के हमले से बचने के तौर तरीके भी बताए। आह्वान किया कि कार्यशाला में सीखे गुर को ग्रामीणों के साथ साझा करें, तभी जागरूकता बढ़ेगी।