देश के लिए खतरा बन रहीं सांप्रदायिक ताकतें: राधा बहन
देहरादून। सांप्रदायिक ताकतें देश के लिए खतरा बनती जा रही हैं। उत्तराखंड में भी ऐसी ताकतें लगातार मजबूत हो रही हैं। पर्वतीय राज्य में घृणा के बीज बोने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। यह बात दून के विभिन्न संघठनों और राजनैतिक दलों की ओर से रविवार को प्रेस क्लब में आयोजित जन सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहीं कौसानी स्थित अनाशक्ति आश्रम की संचालिका राधा बहन ने कही।
उन्होंने कहा कि उन्हें लगता था कि बढ़ती साम्प्रदायिकता के बीच उत्तराखंड में लोग चुप बैठे हुए हैं, लेकिन सम्मेलन को देखकर पता चला कि लोग इन घटनाओं पर पैनी नजर रखे हुए हैं और बहुत कुछ सोच रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि हम जो भी कदम उठाएं, उसमें शांति और अहिंसा का ध्यान सबसे पहले रखा जाना चाहिए। पर्यावरणविद् प्रो. रवि चोपड़ा ने संविधान की रक्षा और सद्भाव के हिमायती लोगों की एक शांति दल बनाने की जरूरत बताई, जो साम्प्रदायिक दंगे जैसी किसी भी स्थिति में मौके पर पहुंचकर शांतिपूर्ण स्थिति बनाने का प्रयास करे। उन्होंने कहा कि इस सेना का संपर्क आम लोगों से भी होना चाहिए और प्रशासनिक अधिकारियों से भी। सम्मेलन का संचालन करते हुए चेतना आंदोलन के शंकर गोपाल ने कहा कि कुछ लोग उत्तराखंड में यह धारणा बनाने की कोशिश कर रहे हैं कि एक समुदाय राज्य के लिए खतरा है। उन्होंने लोहारी के लोगों को बिना कहीं और व्यवस्था किए बेघर करने को लेकर नाराजगी जताई। कवि और अंबेडकर आंदोलन के कार्यकर्ता राजेश पाल ने आरएसएस पर निशाना साधा। भारत ज्ञान विज्ञान समिति के विजय भट्ट ने कहा कि आजादी के बाद हमने विकास और भाईचारे के मामले में जो कुछ हासिल किया था, वह सब दांव पर लगा हुआ है। उन्होंने कहा इसे बचाने के लिए एकजुट होना होगा। महिला मंच की कमला पंत ने कहा कि वर्ग विशेष पर हमला करने की प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है। इसे रोकने के लिए एक सामाजिक आंदोलन की जरूरत है। सीपीआई के समर भंडारी ने कहा कि संविधान, लोकतंत्र और सद्भाव पर हमले बढ़ गए हैं। इस स्थिति को अब ज्यादा दिन चुप बैठकर देखना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार हर मोर्चे पर फेल होने के बाद अब साम्प्रदायिकता को हवा दे रही है। उन्होंने कहा कि नागरिकता संविधान के आधार पर तय होगी, न किस संप्रदाय के आधार पर। सम्मेलन में सपा के डॉ एसएन सचान, सीपीएम के सुरेन्द्र सजवाण, पूर्व गढ़वाल कमिश्नर एसएस पांगती, उमा भट्ट, चेतना आंदोलन की सुनीता देवी, चंद्रा भंडारी, जगमोहन मेहंदीरत्ता, चौ.ओमवीर सिंह, जबर सिंह, थॉमस सेन आदि ने अपने विचार रखे। जनगीत गायक सतीश धौलाखंडी, त्रिलोचन भट्ट, हिमांशु चौहान ने इस अवसर पर जनगीत गाया।
