उत्तरायणी बागेश्वर में आज जनेऊ व मुंडन संस्कार सबसे अधिक
बागेश्वर। मकर पर जनेऊ तथा मुंडल संस्कार का विशेष महत्व है। बागेश्वर को कुमाऊं की काशी कहा जाता है। इस कारण दूर-दूर से लोग इस पर्व पर बच्चों का उपनयन संस्कार कराने यहां आते हैं। कई प्रवासी वाहन बुक कराकर यहां पहुंचे और संस्कार कराकर लौट गए। सबसे अधिक जनेऊ व मुंडल कार्यक्रम सूरजकुंड में हुए। इसके बाद बागनाथ मंदिर के सामने सरयू में हुए। उधर कपकोट सरयू नदी में भी जनेऊ संस्कार हुए।
