रामगढ़ में समय से पहले खिल गया सफेद बुरांश
नैनीताल। मौसम चक्र में परिवर्तन का असर फूलों के खिलने में भी दिखाई देने लगा है। नैनीताल के रामगढ़ स्थित टैगोर टॉप में एकमात्र सफेद बुरांश का पेड़ है। इस वर्ष यहां सफेद बुरांश में दो माह पूर्व ही फूल खिल गए हैं। सामान्य तौर पर अप्रैल-मई में खिलने वाला यह फूल इस साल अपने समयकाल से पूर्व ही खिल गया है। बताया जाता है, कि रामगढ़ के टैगोर टॉप में राष्ट्र कवि रवींद्र नाथ टैगोर ने सफेद बुरांश का पौधा लगाया था।
उच्य हिमालयी क्षेत्र में खिलने वाला सुख, शांति, सम्रद्धि एवं वैभव का द्योतक सफेद बुरांश रामगढ़ के टैगोर टॉप पर अपनी छटा बिखेर रहा है। अमूमन रक्तवर्ण बुरांश के पेड़ कम तापमान वाले पर्वतीय क्षेत्रों में ही मिलते है। अत्यधिक ऊंचाई में वन व बुग्यालों की शोभा बढ़ाने वाले इस दुग्ध धवल का कम ऊंचाई वाले इलाके में खिलना अचरज से कम नहीं है। स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार सफेद बुरांश का यह पौंधा राष्ट्रगान के रचयिता गुरुदेव रवींद्र नाथ टैगोर ने आजादी से पूर्व रामगढ़ प्रवास के दौरान लगाया गया था। प्रदेश के कुमाऊं व गढ़वाल रीजन में पर्वतीय क्षेत्रों के जंगल में फरवरी से अप्रैल मध्य तक लाल बुरांश रुडो ड्रेनड्रॉन के फूलों से सजे रहते हैं। सफेद बुरांश के पेड़ समुद्र तल से करीब 12 हजार फीट की ऊंचाई पर मुनस्यारी व साढ़े आठ हजार ऊंचाई वाले शिमला, हिमांचल की पहाड़ियों में ही पाए जाते हैं। वन व पुष्पों पर शोधकर्ता तरुण जोशी के अनुसार अप्रैल-मई में खिलने वाला सफेद बुरांश इस वर्ष फरवरी में ही खिल गया। उन्होंने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों में इसकी तलाश रुडो ड्रेनड्रॉन कॉम्पोनेन्ट का रंग अत्यधिक शीत में लाल से सफेद हो जाता है। यह प्रजाति मुनस्यारी धारचूला व बुग्यालों के साथ ही हिमाचल, जम्मू कश्मीर के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में देखी जा सकती है।
-मौसम में परिवर्तन का फल-फूल सभी में प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। बुरांश भी समय से पहले खिल गया है। तापमान बढ़ने से फूल समय पर खिलने लगे हैं। बारिश नहीं होने से फूल खिलकर समय से पहले नष्ट भी हो रहे हैं। जमीन में नमी नहीं होना भी इसका एक मुख्य कारण है।
– ममता आर्या, वैज्ञानिक पादप अनुवांशिक संसाधन केंद्र
