January 31, 2026

21 महीने तक जिला जेल में माफिया लगाता रहा जेल में अपना दरबार


रसूख इस कदर था हावी कि चाह कर भी नहीं कर पाते जेलकर्मी उसका विरोध

बस्ती । प्रयागराजके उमेश पाल मर्डर केस में पुलिस रिमांड पर चल रहे माफिया अतीक के जिला जेल में आने पर सबसे पहले कारागार गेट पर अप्रैल 2010 में  जेल पुलिस चौकी स्थापित की गई थी। इसके बाद जेल के मुख्य गेट की सलाखों के दरवाजे को बुलेट प्रूफ बनाया गया था। यह सब कुछ जेल अभिलेखों में दर्ज है। जिला जेल में 30 अप्रैल 2010 से लेकर 6 फरवरी 2012 तक तकरीबन 21 महीने तक माफिया के इशारे पर जेलकर्मी नाचते रहते थे। उसने जेल को होटल बना रखा था। उसकी ओर बंदियों के लिए भी समय-समय पर दावत का इंतजाम किया जाता रहा। जेल के अंदर ही नवरात्र में फलाहार तो रमजान में इफ्तार का भी प्रबंध अतीक की ओर से कराया जाता था। माफिया का रसूख इस कदर हावी था कि किसी जेलकर्मी की विरोध करने की हिम्मत नहीं होती थी। जेल में वह गुर्गों संग दरबार लगाता था। उसकी खातिरदारी के लिए जेल प्रशासन ने सारे कायदे-कानून ताक पर रख दिए। कुछ कर्मचारी न चाहते हुए भी इस काकस का हिस्सा बनने को मजबूर थे। विरोध की स्थिति में उनको खुद पर ही कार्रवाई होने का डर सता रहा था।
– चहारदीवारी में ही दम तोड़ गईं विरोध में उठने वाली आवाजें
शुरू में अतीक को जेल में मिल रही इन सहूलियतों पर अंदरखाने विरोध की स्थिति भी रही पर जिले से लेकर शासन स्तर तक अधिकारियों के झुकाव की वजह से निचला स्टाफ मन मसोस कर रह गया। बाद में अतीक के गुर्गों ने भी अपने स्तर से स्टाफ से लेकर उपदव्री बंदियों तक को सेट कर लिया था। बताते हैं कि जेल के प्रमुख जिम्मेदारों को हर महीने नजराना पहुंचता था। ना चाहते हुए भी जेल कर्मियों को अधिकारियों का हुक्म बजाने के अलावा उनके पास कोई रास्ता भी नहीं था।