पूरे दिन सदन में गहमा गहमी रही
देहरादून। विधानसत्र के दूसरे दिन सदन में कई तरह के मुद्दों पर बहस होती रही। किसी विधायक ने सदन में अपने क्षेत्र की उपेक्षा का मुद्दा उठाया तो किसी ने विकास कार्यो में भ्रष्टाचार का मामला। इस तरह पूरे दिन सदन में गहमा गहमी रही।
युवाओं को नौकरियों की घोषणा नहीं हुई पूरी- यशपाल आर्य
सदन में बेरोजगारी का मुद्दा भी गरमाया। प्रीतम सिंह ने कहा कि युवा साल में दो करोड़ रोजगार की आस में है। सत्ता पक्ष मनरेगा के मजदूर , पकौड़े बनाने वालों को रोजगार बताते हैं। नियुक्ति पत्र बांटे जा रहे हैं। युवा भर्ती पर फार्म भरकर परीक्षा देता है। चयन होने पर सरकार नियुक्ति पत्र बांट रही है। परीक्षा में नकल का बोलबाला रहता है। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि सरकार ने 22 हजार को सरकारी नौकरी की घोषणा की थी। लेकिन उसका कुछ नहीं पता है। आंदोलन करने वालों पर फर्जी मुकदमे वापस लेने की बात की गई, लेकिन अब तक नहीं हुए। इस पर मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि भर्ती परीक्षाओं में सीएम धामी ने कड़े कदम उठाये हैं। देश का सबसे सख्त नकलरोधी कानून प्रदेश में लागू हुआ है। पिछले दिनों 57 नामजद करते हुए चार मुकदमे हुए थे। सीएम की घोषणा के तहत मुकदमे वापस लेने की कार्रवाई चल रही है। पेपर लीक प्रकरण में आठ मामलों में 113 पर मुकदमे हुए।
सशक्त भू-कानून की आवश्यकता- मनोज तिवारी
नियम 58 के तहत कांग्रेस विधायक मनोज तिवारी ने कहा कि प्रदेश में भूमाफिया राज है। छोटे किसानों की भूमि को ओने पौने दामों में खरीदा जा रहा है। इसलिए प्रदेश में सशक्त भू-कानून की आवश्यकता है। छह साल से लगातार इसकी मांग उठ रही है। मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने जवाब में कहा कि भू-कानून समिति का गठन किया गया था। अध्यक्ष सेवानिवृत्त आईएएस सुभाष कुमार थे। समिति ने संस्तुति सरकार को
उपलब्ध कराई थी। जनभावनाओं व प्रदेश में निवेश की संभावना के बीच ऐसे बिंदु समिति ने रखे, जिससे विकास व भू संरक्षण के बीच समन्वय बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
काम साबित कर दें तो मैं इस्तीफा दे दूंगा- उमेश कुमार
नियम 58 के तहत विधायक उमेश कुमार ने कहा कि हरिद्वार के खादर क्षेत्र में आपदा से भारी नुकसान हुआ। चेक वितरण में गड़बड़ी की जा रही है। 15 बीघा वालों को 2000 और दो बीघा वालों को 15 हजार मुआवजा दे रहे हैं। 1100 रुपये का मुआवजा प्रति बीघा दिया जा रहा है। जबकि एक बीघा में 1200 का डीजल लग जाता है। मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि जब मैं विधायक के क्षेत्र में गया था तो पूरा जलमग्न था। दुकानों में समान खराब हो चुका था। अब वहां काम हुए हैं। इस पर उमेश कुमार ने कहा कि अगर 22 करोड़ के काम को साबित कर दें तो मैं इस्तीफा दे दूंगा। उमेश ने आरोप लगाया कि सिंचाई विभाग में भारी भ्रष्टाचार है। मंत्री सतपाल महाराज ने कहा कि ऐसा है तो वे वह स्थलीय निरीक्षण के लिए उनके साथ जाने को तैयार हैं।
सदन को गुमराह कर रहे मंत्री-हरीश धामी
धारचूला विधायक हरीश धामी ने विरोध किया कि उनकी विधानसभा को बेगाना बनाया जा रहा है। सीमांत के लोगों को मजबूर किया जा रहा है। हरीश धामी ने आरोप लगाया कि सरकार धारचूला के साथ गलत व्यवहार कर रही है। मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल का कहना है कि वह राज्य की बात कर रहे हैं। आपदा पूरे प्रदेश में आई है। हरीश धामी ने आरोप लगाया कि मंत्री सदन को गुमराह कर रहे हैं।
हरीश धामी ने कहा, 60 परिवार आज भी स्टेडियम में रह रहे हैं, लेकिन सरकार उनका पुनर्वास नहीं कर रही। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा पूरा धारचूला खतरे की जद में है। सरकार को संज्ञान लेना चाहिए। विस्थापन की कार्रवाई की जाए। हरीश धामी ने कहा कि धारचूला में अलग नियम बनाये जा रहे हैं। एक प्रदेश में एक कानून हो। मंत्री अग्रवाल ने कहा कि प्रभावितों के पुनर्वास के लिए जमीन का चयन करने की प्रक्रिया जारी है। धारचूला के प्रभावित क्षेत्र की डीपीआर स्वीकृत हो चुकी है।
आपदा से पूर्व नहीं ली जाती बैठक-सुमित हृदयेश
विधायक सुमित हृदयेश ने कहा कि हर जिले में प्रभारी मंत्री बनाये गए हैं, लेकिन कोई भी बैठक आपदा से पूर्व नहीं ली जाती है। इस बार बरसात में 60 फीसदी लोगों के घरों में पानी भरा। पूरे तराई क्षेत्र में भारी नुकसान हुआ है। रजिस्ट्री की जमीन के बह जाने के बाद महज 1.25 लाख मुआवजा दिया जाता है। वहीं, विधायक अनुपमा रावत ने कहा कि तटबंधों के लिए आपदा का इंतजार किया जाता है। हरिद्वार के कांगड़ी गांव बहने की कगार पर है। तटबंध बनाने के लिए कट्टे मिट्टी से भरकर रखते हैं। किसानों को मात्र 1175 प्रति बीघा मुआवजा दिया जा रहा है। जबकि कम से कम 15 हजार का खर्च आता है।
आपदा से पहले बैठक करें अधिकारी- ममता राकेश
भगवानपुर विधायक ममता राकेश ने कहा कि जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी/डीएम बरसात से पहले जिले के विधायकों के साथ बैठक करें। साथ ही उनसे प्रस्ताव लें, जिससे कि आपदा में बचाव हो सके, लेकिन अधिकारी सुनते नहीं हैं। आपदा में खंबे टूटे, लेकिन आज तक ठीक नहीं हुए। 12 विद्यालय ऐसे हैं, जहां बारिश में छुट्टी करनी पड़ती है। उन्होंने मानकों में परिवर्तन की मांग की।
दैवीय आपदा के नियमों में बदलाव की जरूरत: विक्रम नेगी
प्रतापनगर विधायक विक्रम नेगी ने कहा कि उत्तराखंड जंगल, चट्टानों, घाटी-चोटी, ग्लेशियर का प्रदेश है। यहां हर साल बारिश की वजह से बड़े स्तर पर भूमि का कटाव होता है। इसलिए दैवीय आपदा के नियमों में बदलाव की जरूरत है।
