March 22, 2026

सशक्त कानून से बचेंगे उत्तराखंड के जल, जंगल और जमीन’


हल्द्वानी ।  पहाड़ी आर्मी उत्तराखंड संगठन ने प्रदेश में सख्त भू-कानून और मूल निवास के लिए पांचवी अनुसूची लागू करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सशक्त कानून से ही उत्तराखंड के जल, जंगल और जमीन बच सकेंगे। इसके लिए सरकार को संविधान की 5वीं अनुसूची लागू करनी होगी। शुक्रवार को आवास विकास कॉलोनी स्थित एक रेस्टोरेंट में पहाड़ी आर्मी उत्तराखंड ने पत्रकार वार्ता की। यहां संगठन के अध्यक्ष हरीश रावत ने कहा कि भू-कानून, मूल निवास और परिसीमन आज हर उत्तराखंडी की मांग है। मगर सरकार इसे नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने कहा कि यूपी में रहने के दौरान ही पर्वतीय क्षेत्र के जल, जंगल और जमीन से जुड़े कई अधिकार छीन लिए गए थे। तब से अपनी संस्कृति, विरासत, जल, जंगल और जमीन को बचाने के लिए उत्तराखंड में आंदोलन किया जा रहा है। हर तरफ से केवल एक मांग है कि संविधान की पांचवी अनुसूची लागू की जाए। कहा कि उत्तराखंड के हिमाचल से लगे जौनसार भाबर क्षेत्र में आज भी इस तरह के कुछ कानून लागू हैं, जिस कारण बाहरी लोगों को वहां जमीन खरीदना मुश्किल है। उत्तराखंड एकता मंच के एडवोकेट संजय राठौर ने कहा कि संविधान की 5वीं और छठी अनुसूची में शामिल होने के बाद न सिर्फ यहां जल, जंगल और जमीन बचेगी, बल्कि यहां के युवाओं को केंद्रीय शिक्षण संस्थानों और नौकरियों में 7.5 प्रतिशत आरक्षण का लाभ भी मिलेगा। आगामी 20 अक्तूबर को हल्द्वानी में मूल निवास-1950, भू-कानून और पांचवी अनुसूची लागू करने को लेकर अधिवेशन प्रस्तावित है। जिसमें बुद्धिजीवी, लेखक, साहित्यकार, इतिहासकार, रिटायर्ड अफसर रहेंगे। इस दौरान कैलाश डालाकोटी, गौरव सिंह आदि रहे।