समाज सेवा की तपस्विनी राधा भट्ट कौसानी में पद्मश्री से हुई अलंकृत
गांधीवादी विचारधारा की सशक्त प्रतीक रहीं राधा बहन को उनके निवास पर सौंपा गया पद्मश्री सम्मान
( अर्जुन राणा )
कौसानी बागेश्वर । हिमालय की गोद में बसा शांत, सुरम्य कौसानी कस्बा रविवार को एक ऐतिहासिक और भावनात्मक क्षण का साक्षी बना, जब राष्ट्र के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक पद्मश्री पुरस्कार को सामाजिक सेवा की महान साधिका राधा भट्ट को उनके निवास स्थान पर प्रदान किया गया। दिल्ली में आयोजित आधिकारिक समारोह में स्वास्थ्य कारणों से न जा पाने के कारण यह अलंकरण कौसानी में ही सम्पन्न हुआ।
अल्मोड़ा के जिलाधिकारी आलोक कुमार पांडे ने स्वयं उनके निवास पर पहुंचकर यह प्रतिष्ठित सम्मान सौंपा। इस अवसर पर स्थानीय ग्रामीण, सामाजिक कार्यकर्ता, महिलाएं और युवा बड़ी संख्या में उपस्थित थे। कार्यक्रम में एक विशेष ऊर्जा और श्रद्धा का भाव देखा गया, मानो स्वयं गांधीजी की विचारधारा उस स्थल पर जीवंत हो उठी हो ।
16 अक्टूबर 1933 को अल्मोड़ा जिले के एक छोटे से गांव ओखलकांडा में जन्मी राधा भट्ट का जीवन संघर्षों, विचारों और आत्मबल की अनुपम गाथा है। उन्होंने मात्र 18 वर्ष की आयु में विनोबा भावे के भूदान आंदोलन में भाग लेकर सामाजिक कार्य की राह पकड़ी। यही नहीं, वे जयप्रकाश नारायण के सर्वोदय आंदोलन से भी जुड़ी रहीं और भारत में सामाजिक परिवर्तन की नींव रखने वाले कई आंदोलनों का नेतृत्व किया।
उनका जीवन विशेष रूप से महिला सशक्तिकरण, ग्राम सुधार, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में समर्पित रहा। राधा बहन वर्षों तक गांधी शांति प्रतिष्ठान, सर्वोदय मंडल, सेवा आश्रम कौसानी और वर्धा स्थित गांधी स्मारक निधि से जुड़ी रहीं, जहाँ उन्होंने गांधीवादी मूल्यों के प्रचार-प्रसार में अहम भूमिका निभाई।
जब जिलाधिकारी आलोक पांडे ने उन्हें पद्मश्री का प्रशस्ति पत्र और प्रतीक सौंपा, तो पूरे वातावरण में एक अद्भुत गरिमा और श्रद्धा का संचार हुआ। राधा बहन, जो आज भी अत्यंत विनम्रता और सादगी से जीवन जीती हैं, ने मुस्कराते हुए इस सम्मान को उन सभी लोगों के प्रति समर्पित किया जो वर्षों से समाजसेवा के विभिन्न क्षेत्रों में उनके साथ खड़े रहे।
डीएम पांडे ने कहा,
“राधा बहन जैसे व्यक्तित्व हमारे समाज की असली पूंजी हैं। उनका जीवन हम सभी के लिए एक जीवंत प्रेरणा है। ये सम्मान न केवल उन्हें, बल्कि समूचे उत्तराखंड और गांधीवादी आंदोलन को गौरवान्वित करता है।
सम्मान समारोह में कौसानी सेवा आश्रम की महिला कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवकों और स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया। कई लोगों की आंखों में सम्मान और गर्व के आंसू थे। यह केवल एक पुरस्कार समारोह नहीं, बल्कि विचारों, आदर्शों और संघर्षों के प्रति एक सामूहिक नमन था।
राधा बहन का जीवन यह दर्शाता है कि एक नारी, अगर विचारों में स्पष्टता और कर्म में निरंतरता रखे, तो वह समाज की दिशा ही नहीं, उसकी चेतना भी बदल सकती है। उन्होंने न केवल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का काम किया, बल्कि अनेक गांवों को जागरूकता, शिक्षा और स्वास्थ्य के पथ पर अग्रसर किया।
इस समारोह ने यह सिद्ध कर दिया कि सम्मान केवल दिल्ली के भव्य मंचों पर नहीं, बल्कि गांव की मिट्टी में, साधना की तपोभूमि पर भी हो सकते हैं। राधा भट्ट का जीवन उन सभी के लिए प्रेरणा है जो सेवा को ही सच्चा धर्म मानते हैं।
पद्मश्री पुरस्कार भारत सरकार द्वारा प्रदान किया जाने वाला देश का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जो विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण सेवा और उपलब्धियों के लिए दिया जाता है। राधा भट्ट को यह पुरस्कार सामाजिक सेवा के क्षेत्र में उनके अद्वितीय योगदान के लिए दिया गया है ।
