चटोरे लोगों के लिए बड़ी चेतावनी …। !
केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए समोसा, जलेबी, वडा पाव इत्यादि खाद्य पदार्थों पर चेतावनी देने के निर्देश दिए हैं कि इसमें कितनी तेल और शुगर वापरी गई है। भारत एक युवा देश है लेकिन हमारे युवा जंक फूड और अस्वास्थ्यकारक खाद्य पदार्थ खाने के आदी हो गए हैं। अनेक वजहों से उन्हें घर का सात्विक भोजन पसंद नहीं आता। जाहिर है यह समस्या बीमारी का रूप ले चुकी है। क्या कभी सोचा है कि एक समोसे में 362 कैलोरी और 28 ग्राम फैट, एक जलेबी में शुगर का खतरनाक स्तर, और एक वड़ा पाव में लगभग 263 कैलोरी आपके शरीर के साथ क्या कर रहे हैं ? यही नहीं, हमारे बच्चों के टिफिन बॉक्स में रोज़ाना जो नूडल्स, पास्ता, बर्गर और सैंडविच जाते हैं, उनमें छिपी वसा और चीनी धीरे-धीरे हमारे समाज को बीमार और कमजोर बना रही है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट बताती है कि भारत में मोटापे के मामले पिछले दस वर्षों में दोगुने हो चुके हैं। 5 से 19 साल के बच्चों में 14 फीसदी से अधिक अब मोटापे या ओवरवेट श्रेणी में आते हैं। ये आंकड़े सिर्फ संख्या नहीं, आने वाले समय में होने वाले मधुमेह, हृदय रोग और कैंसर के खतरे की घंटी हैं। इस पृष्ठभूमि में भारत सरकार का स्वास्थ्य मंत्रालय जो कदम उठा रहा है, वह स्वागत योग्य है। समोसा, जलेबी, वड़ा पाव जैसे लोकप्रिय स्नैक्स पर सिगरेट जैसी चेतावनी लगाने की योजना एक साहसिक पहल है। योजना के तहत केंद्रीय संस्थानों और सार्वजनिक स्थानों पर “ऑयल और शुगर बोर्ड” लगाए जाएंगे, जिन पर स्पष्ट रूप से लिखा होगा कि इस भोजन में कितनी कैलोरी, कितनी वसा और कितनी चीनी है। यह पहल नागपुर के एम्स सहित कुछ संस्थानों से शुरू हो रही है। लेकिन सवाल यह है—क्या सिर्फ बोर्ड लगाने से आदतें बदलेंगी? भारत में साक्षरता और भाषाई विविधता को देखते हुए विशेषज्ञ मानते हैं कि “हेल्थ स्टार रेटिंग” नहीं, बल्कि सीधे चेतावनी लेबल जरूरी हैं। चिली, मेक्सिको जैसे देशों में यह मॉडल सफल रहा है, जहां चीनी और फैट की खपत में उल्लेखनीय कमी आई। भारत को भी यही करना होगा। मगर केवल लेबल और बोर्ड पर्याप्त नहीं। हमें जनजागरण की लहर उठानी होगी। क्योंकि सबसे ज्यादा खतरे में हैं हमारे बच्चे ! जो देश का भविष्य हैं। आज उनका बचपन जंक फूड में डूबा है। अगर यह नहीं बदला तो उनकी कार्यक्षमता, उनकी सेहत, और आगे चलकर देश की आर्थिक प्रगति पर असर पड़ेगा। यह सिर्फ स्वास्थ्य का मुद्दा नहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा है। इसलिए सरकार के साथ-साथ सामाजिक संस्थाएं, अभिभावक, स्कूल और मीडिया सबको मोर्चा संभालना होगा। टीवी, रेडियो, सोशल मीडिया पर स्वास्थ्य अभियानों को आक्रामक तरीके से चलाना होगा। बच्चों को यह सिखाना होगा कि स्वाद से बढक़र सेहत है। आज हम अगर चुप रहे तो कल हमें मोटापे, बीमारियों और चिकित्सा खर्च के पहाड़ के नीचे दबना होगा। सवाल सिर्फ समोसे, जलेबी या बर्गर का नहीं है, सवाल है आने वाली पीढ़ी के स्वस्थ भारत का। अब समय आ गया है कि स्वाद के नाम पर जहर पर कड़ी चेतावनी लगे और लोग जागरूक हों।
