माँ भगवती के नारों से गूँजी द्योनाई घाटी, दस वर्षों बाद धूमधाम से मनाया जा रहा धार्मिक “आठू पर्व”
( अर्जुन राणा )
बागेश्वर/गरुड़ । तहसील की ऐतिहासिक और धार्मिक आस्था का प्रतीक आठू पर्व इन दिनों द्योनाई घाटी में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। माँ भगवती के जागरण के रूप में प्रसिद्ध यह पर्व पूरे क्षेत्र में भक्ति और आस्था की अनूठी छटा बिखेर रहा है। दस वर्षों बाद आयोजित इस पर्व में आसपास के गाँवों से ही नहीं, बल्कि दूर-दराज़ क्षेत्रों से भी हजारों श्रद्धालु पहुँच रहे हैं।
कुलदेवी माँ भगवती का जागरण
मान्यता है कि आठू पर्व कुलदेवी माँ भगवती के जागरण के रूप में मनाया जाता है। श्रद्धालु प्रतिदिन रात को माँ भगवती के झोड़े गाते हैं। कहा जाता है कि इन भजनों और झोड़ों से प्रसन्न होकर माँ भगवती अपने डंगरिये के शरीर में अवतरित होती हैं और भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करती हैं। भक्तजन इस दिव्य अनुभव को आत्मसात कर श्रद्धा से झूम उठते हैं।
पंचमी पर गंगा स्नान और कलश यात्रा
पर्व के पंचमी तिथि पर द्योनाई, भगरतोला, कोट्टुलारी और दरण गाँवों की महिलाओं ने माँ भगवती के साथ गंगा स्नान कर क्षेत्र की मंगलकामना की। इसके उपरांत पूरे क्षेत्र में भव्य कलश यात्रा निकाली गई। हजारों की संख्या में मौजूद भक्त तुरी, भेरी, भौकर और नगाड़ों की गूँज के बीच माँ भगवती के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़े। सम्पूर्ण द्योनाई घाटी माँ के जयकारों से गूँज उठी और वातावरण भक्तिमय हो गया।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
कोट्टुलारी के पूर्व प्रधान राजेंद्र किरमोलिया ने बताया कि सैकड़ों वर्ष पूर्व मैठानी लोग अपने साथ माँ भगवती को इस क्षेत्र में लाए थे। प्रारंभ में माँ की पूजा किसी अन्य स्थल पर होती थी, किंतु स्थानाभाव के कारण बाद में मंदिर को यहाँ स्थानांतरित किया गया। तभी से द्योनाई घाटी इस पर्व की स्थायी भूमि बनी हुई है।
विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति
आठू पर्व के अवसर पर आयोजित कलश यात्रा में दर्जा राज्य मंत्री शिव सिंह बिष्ट, जिला पंचायत बागेश्वर की नवनिर्वाचित अध्यक्ष श्रीमती शोभा आर्या, गरुड़ के नवनिर्वाचित ब्लॉक प्रमुख किसन बोरा समेत कई जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। उन्होंने माँ भगवती से क्षेत्र की सुख-समृद्धि और जनकल्याण की कामना की।
श्रद्धालुओं का जनसैलाब
दस साल बाद मनाए जा रहे इस पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। पूरे द्योनाई घाटी में इन दिनों पर्व की रौनक छाई हुई है। दूर-दराज़ से आए भक्तजन स्थानीय ग्रामीणों के साथ धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होकर माँ का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं।
आठू पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का भी अद्भुत उत्सव है। दस वर्षों बाद इसकी धूम ने द्योनाई घाटी को भक्ति और उमंग के रंगों से सराबोर कर दिया है।
