January 29, 2026

अफवाहों पर पुलिस का करारा प्रहार, मानवता की मिसाल बनी बागेश्वर पुलिस‘बांग्लादेशी’ बताकर मूक-बधिर युवक को घेरने वालों पर कार्रवाई, परिजनों से मिलवाया पुलिस ने

बागेश्वर। अफवाहों के दौर में जहाँ भीड़ का उन्माद कभी भी हिंसा में बदल सकता है, वहीं बागेश्वर पुलिस ने सूझबूझ, संवेदनशीलता और सख़्ती का संतुलित उदाहरण पेश किया है। पुलिस अधीक्षक बागेश्वर श्री चंद्रशेखर घोडके के निर्देशन में जनपद पुलिस एक ओर मानवीय कर्तव्यों का निर्वहन कर रही है, तो दूसरी ओर समाज में भ्रम और नफ़रत फैलाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई कर रही है।
दिनांक 03 जनवरी 2026 को कुछ स्थानीय लोग एक लगभग 30 वर्षीय मूक-बधिर युवक को थाना कपकोट लेकर पहुँचे और बिना किसी ठोस आधार के उसे संदिग्ध तथा “बांग्लादेशी” बताने लगे। युवक के बोल पाने में असमर्थ होने के कारण उसकी पहचान करना कठिन था, जिसका लाभ उठाकर उसे शक के घेरे में खड़ा करने की कोशिश की गई। यह स्थिति क्षेत्र की शांति के लिए बेहद संवेदनशील और खतरनाक हो सकती थी।
थानाध्यक्ष कपकोट श्री प्रताप सिंह नगरकोटी ने भीड़ के दावों में बहने के बजाय विवेकपूर्ण निर्णय लेते हुए युवक की वेशभूषा, हावभाव और व्यवहार का सूक्ष्म अवलोकन किया। उन्होंने प्रथम दृष्टया युवक के स्थानीय निवासी होने की संभावना जताई और तत्काल आसपास के गांवों में फोटो के माध्यम से तस्दीक की प्रक्रिया शुरू करवाई।
पुलिस के प्रभावी प्रयासों के बाद युवक की पहचान देवेंद्र उर्फ बबलू पुत्र हरीश राम, निवासी ग्राम गडुवा सिरमौर, थाना कांडा के रूप में हुई। सूचना मिलते ही उसके पिता हरीश राम थाने पहुँचे और बताया कि उनका पुत्र मूक-बधिर है, जो घर से रास्ता भटककर कहीं चला गया था और परिवार लंबे समय से उसकी तलाश कर रहा था। पुलिस ने युवक को पूरी तरह सुरक्षित उसके परिजनों के सुपुर्द किया, जिस पर परिजनों ने बागेश्वर पुलिस का आभार व्यक्त किया।
मामले की जांच में यह भी सामने आया कि युवक को थाने लाने वाले तीन नवयुवक बिना किसी तथ्य या पुष्टि के उसे “बांग्लादेशी” बताकर क्षेत्र में झूठी अफवाह फैला रहे थे। उनके इस कृत्य से आम जनता में भ्रम फैलने के साथ-साथ क्षेत्र में तनाव और अशांति का माहौल बनने की आशंका पैदा हो गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तीनों युवकों के विरुद्ध धारा 126/135 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के अंतर्गत चालानी कार्रवाई की।
बागेश्वर पुलिस ने इस प्रकरण के माध्यम से स्पष्ट संदेश दिया है कि बिना पुष्टि किसी व्यक्ति पर आरोप लगाना न केवल गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि कानूनन अपराध भी है। पुलिस ने आमजन से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की भ्रामक सूचना या अफवाह सोशल मीडिया अथवा सार्वजनिक स्थानों पर साझा न करें, शांति व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें और किसी भी संदिग्ध स्थिति की जानकारी सीधे पुलिस को दें, न कि कानून को अपने हाथ में लें।