January 17, 2026

आधार की बड़ी चूक : एक आधार, दो पहचान! शामा से उठी प्रशासनिक चूक की गूंज, जिला प्रशासन की तत्परता ने टाला बड़ा संकट


बागेश्वर । जनपद के शामा क्षेत्र से सामने आया यह प्रकरण केवल एक तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि नागरिक पहचान व्यवस्था की संवेदनशीलता पर सीधा प्रश्न खड़ा करने वाला मामला है। जुड़वा भाई-बहन को एक ही आधार संख्या जारी हो जाना, उस प्रणाली की गंभीर चूक को उजागर करता है जिसे देश की पहचान व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। इस असाधारण और चिंताजनक तथ्य के प्रकाश में आते ही जिला प्रशासन ने जिस तत्परता और गंभीरता का परिचय दिया, वह प्रशासकीय सजगता का उदाहरण बनकर सामने आया है।
जिलाधिकारी आकांक्षा कोंडे ने मामले की गंभीरता को समझते हुए बिना विलंब तत्काल संज्ञान लिया और ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर को आवश्यक व प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश दिए। यह हस्तक्षेप न केवल औपचारिक था, बल्कि एक जिम्मेदार प्रशासनिक चेतना का संकेत भी, जो यह स्वीकार करती है कि पहचान से जुड़ी त्रुटियाँ नागरिक अधिकारों पर गहरा प्रभाव डाल सकती हैं।
ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर रोहित बहुगुणा द्वारा यूआईडीएआई के क्षेत्रीय कार्यालय, देहरादून से समन्वय स्थापित कर मामले की तह तक पहुँचने का प्रयास किया गया। यूआईडीएआई के सहायक महाप्रबंधक नितेश सैनी ने इसे ‘मिक्स बायोमेट्रिक’ का मामला बताया, जो आधार प्रणाली में होने वाली दुर्लभ किंतु गंभीर तकनीकी त्रुटियों में से एक मानी जाती है। यह स्वीकारोक्ति अपने आप में इस बात का प्रमाण है कि तकनीक की विश्वसनीयता भी सतत निगरानी और सुधार की मांग करती है।
यूआईडीएआई के निर्देशानुसार संबंधित आधार संख्या को निरस्त करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है तथा टेक सेंटर को आवश्यक सूचना प्रेषित कर दी गई है। प्राधिकरण के अनुसार, एक सप्ताह के भीतर उक्त आधार संख्या को पूरी तरह निरस्त कर दिया जाएगा, जिसके बाद दोनों बच्चे पुनः आधार नामांकन कराकर अलग-अलग नई पहचान प्राप्त कर सकेंगे। यह कदम न केवल तकनीकी सुधार है, बल्कि प्रभावित परिवार के लिए राहत का संदेश भी है।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नागरिकों की पहचान से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही अस्वीकार्य है और ऐसे सभी प्रकरणों में त्वरित, पारदर्शी एवं संवेदनशील कार्रवाई सर्वोच्च प्राथमिकता पर रहेगी। शामा का यह मामला एक चेतावनी भी है और एक उदाहरण भी—चेतावनी व्यवस्था की संभावित कमजोरियों की, और उदाहरण उस प्रशासनिक इच्छाशक्ति का, जो समय रहते हस्तक्षेप कर संकट को गहराने से रोक सकती हैं।

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