January 17, 2026

जसुली बुढ़ी शौक्याणी ने भारत ही नहीं नेपाल में भी बनाई थीं धरमशालाएं’


बागेश्वर ।  जसुली बुढ़ी शौक्याणी लला जीर्णोद्वार समिति के अध्यक्ष तथा जुसली के पड़पॉत्र फली सिंह दत्ताल ने कहा कि जसुली बुढ़ी ने उत्तराखंड के अलावा नेपाल में भी धरमशाला बनाई थीं। दस्तावेजों के अनुसार 450 धरमशालाएं थीं। इनमें से 70 धरमशाला मिल गई हैं। अन्य की तलाश जारी है। जिला बार ऐसोसिएशन परिसर पर पत्रकारों को दत्ताल ने कहा कि 1900 में जुसली ने उत्तराखंड के अलावा नेपाल में धरमशाला बनाईं। इसमें बागेश्वर में चौंरा तथा कांडाधार में धरमशाला हैं। उन्होंने कहा कि उनके दादा सुनपाल सिंह दत्ताल थे तथा दत्तक पुत्र सेनु सिंह थे। उन्होंने कहा कि जसुली दादी के पति जमू व्यापारी थी।उनकी मृत्यु हो गई थी। वह काफी धनवान थीं। वह अपने धन को पंचाचूली नदी में बहाने लगे, लेकिन तत्काल अंग्रेज शासक रामजे ने उन्हें रोका तथा उन्हें प्रेरित किया। जन सेवा में लगाने को कहा। तभी यह धरमशालाएं बनीं। उस समय लोग पैदल चलते थे। वाहन आदि की व्यवस्था नहीं थीं। पिथौरागढ़, बागेश्वर अल्मोड़ा, हल्द्वानी के रास्ते में कई धरमशालाएं थीं। बद्रीनाथ रूट पर भी निर्माण किया गया। इनके जीर्णोद्वार के लिए समिति वर्तमान में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि नेपाल में भी दो धरमशालाएं मिली हैं। पिथौरागढ़ के खीनापानी, सतगढ़ तथा चंडाक में गहैं। उनकी समिति से 265 लोग जुड़े हुए हैँ। धरमशालाओं में अतिक्रमण हुआ है। किसी ने घर बना लिया है। नेशनल हाइवे में भी दब गई हैं। इस अवसर पर गंगा सिंह पांगती, गोविंद सिंह भंडारी, कुंदन धपोला, आईडी धामी आदि उपस्थित थे।