May 3, 2026

जनरल सेक्रेटरी भारत वर्ष डॉ मीनाक्षी शर्मा ने गरुड से किया उत्ताखण्ड में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कमीशन का आगाज़, ये रहे नीव के पत्थर


बागेश्वर , गरुड । जनपद के गरुड़ क्षेत्र में आज इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन (IHRC) की एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं दूरगामी प्रभाव वाली बैठक का आयोजन किया गया, जिसने मानवाधिकार संरक्षण की दिशा में एक नए अध्याय का सूत्रपात किया। यह बैठक डॉक्टर मीनाक्षी शर्मा जनरल सेक्रेटरी भारत वर्ष की गरिमामयी अध्यक्षता में संपन्न हुई, जिसमें संगठन की 15 सदस्यीय प्रदेश स्तरीय कार्यकारिणी का विधिवत गठन किया गया। बैठक का वातावरण गंभीर, उद्देश्यपरक और मानवाधिकारों के प्रति गहरी प्रतिबद्धता से परिपूर्ण रहा।
बैठक के दौरान IHRC के प्रोजेक्ट्स के अंतर्गत कई अहम प्रस्तावों पर विस्तार से मंथन किया गया। विशेष रूप से आम जनमानस को मानवाधिकारों के प्रति जागरूक करने हेतु व्यापक जागरूकता अभियानों के संचालन, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानव श्रृंखला के माध्यम से वैश्विक संदेश देने, अपराध नियंत्रण हेतु पुलिस प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करने तथा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मानवाधिकार चेतना को सशक्त रूप से प्रस्तुत करने जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि संगठन केवल वैचारिक विमर्श तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जमीनी स्तर पर ठोस और प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करेगा।
इस अवसर पर नवगठित कार्यकारिणी में हरीश जोशी, नंदन सिंह अलमिया, दीवान सिंह नेगी एवं जगदीश आर्या को प्रदेश राज्य महासचिव जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण दायित्व सौंपे गए, जिससे संगठनात्मक ढांचे को मजबूती प्रदान की जा सके। वहीं उमेश पाण्डे को राज्य कानूनी सलाहकार, चंद्रशेखर बड़सीला को प्रदेश राज्य सचिव, अर्जुन राणा को राज्य लोक सेवक तथा देवेन्द्र फर्स्वाण को स्टेट गठन मंत्री नियुक्त किया गया। इसके अतिरिक्त रोहित चंद्र पाण्डे एवं हीरा सिंह मेहरा को राज्य लोक सेवक और अशोक थायत को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई।
बैठक में यह भी स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया कि इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन मानवाधिकारों के संरक्षण, संवर्धन और उल्लंघन के विरुद्ध संघर्ष को पूरी निष्ठा, पारदर्शिता और संवैधानिक मर्यादाओं के भीतर रहकर आगे बढ़ाएगा। वक्ताओं ने कहा कि यह संगठन शासन, प्रशासन और समाज के बीच एक सशक्त सेतु के रूप में कार्य करेगा, ताकि प्रत्येक नागरिक को उसके मूल अधिकारों की अनुभूति और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
कुल मिलाकर गरुड़ में आयोजित यह बैठक न केवल एक संगठनात्मक प्रक्रिया थी, बल्कि यह मानवाधिकारों के प्रति प्रतिबद्ध, संगठित और दूरदर्शी प्रयासों का एक स्पष्ट संकेत भी थी, जो आने वाले समय में राज्य ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी प्रभावी छाप छोड़ने की क्षमता रखती है।