जिलाप्रशासन का दूरदर्शी संकल्प: कुटकी सहित जड़ी-बूटी खेती से सशक्त होगा पर्वतीय किसान, क्लस्टर मॉडल से खुलेगी समृद्धि की राह
बागेश्वर। पर्वतीय अंचलों में कृषि को लाभकारी और टिकाऊ स्वरूप देने की दिशा में जिलाप्रशासन ने एक और सशक्त पहल की है। जिलाधिकारी आकांक्षा कोंडे ने पंचायत भवन कर्मी में प्रगतिशील काश्तकारों के साथ संवाद कर जड़ी-बूटी उत्पादन, विशेषकर कुटकी की खेती को प्रोत्साहित करने पर गहन विचार-विमर्श किया। इस अवसर पर किसानों ने जड़ी-बूटी खेती से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं, चुनौतियों और संभावनाओं पर अपने अनुभव साझा किए, जिन पर जिलाधिकारी ने गंभीरतापूर्वक संज्ञान लिया।
जिलाधिकारी ने कहा कि जड़ी-बूटी खेती में अपार आर्थिक और पर्यावरणीय संभावनाएँ निहित हैं। पारंपरिक फसलों के साथ-साथ कुटकी जैसी औषधीय फसलों को अपनाकर किसान अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि क्लस्टर आधारित खेती से न केवल उत्पादन में गुणात्मक सुधार होगा, बल्कि विपणन की बेहतर व्यवस्था के माध्यम से किसानों को अधिक लाभ भी प्राप्त होगा। जड़ी-बूटी खेती जंगली जानवरों से अपेक्षाकृत सुरक्षित होने के कारण पर्वतीय क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है, जिससे फसल नुकसान की समस्या भी काफी हद तक समाप्त होती है।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि जड़ी-बूटी उत्पादन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और रोजगार के स्थानीय अवसर बढ़ने से पलायन पर प्रभावी रोक लगेगी। कुटकी के साथ इंटर-क्रॉपिंग को बढ़ावा देने पर बल देते हुए जिलाधिकारी ने काश्तकारों के प्रस्तावों को स्वीकृत करने का आश्वासन दिया। साथ ही सिंचाई सर्वेक्षण हेतु खंड विकास अधिकारी को आवश्यक निर्देश दिए गए, ताकि खेती के लिए बुनियादी सुविधाएँ समय पर उपलब्ध कराई जा सकें।
जिलाधिकारी ने मृदा परीक्षण, किसानों के नियमित प्रशिक्षण, सिंचाई सुविधा, तारबाड़, खाद एवं कीट नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जिला भेषज संघ को त्वरित और प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यदि बड़े स्तर पर उत्पादन होता है तो जिलाप्रशासन द्वारा जड़ी-बूटी फसलों के विपणन और वितरण की समुचित व्यवस्था भी की जाएगी, जिससे किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य प्राप्त हो सके।
मुख्य विकास अधिकारी आर.सी. तिवारी ने इस अवसर पर कहा कि जिला प्रशासन का स्पष्ट और दीर्घकालिक विजन है कि प्रत्येक खेत तक जड़ी-बूटी खेती की अवधारणा को पहुँचाया जाए। उन्होंने जानकारी दी कि अब तक किसानों को चार चरणों में प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है। कुटकी की खेती में जोखिम कम और लाभ अधिक है तथा शीघ्र ही मिनी बैंक के माध्यम से किसानों को सभी आवश्यक संसाधन और सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँगी।
कार्यक्रम में जड़ी-बूटी उत्पादन से जुड़े लोकपाल सिंह, प्रताप सिंह, नंदन सिंह दुबड़िया, उमा देवी, ममता देवी, सुंदर सिंह, मोहिनी दानू, भागीचंद तथा स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने अपने अनुभव साझा किए। वर्तमान में जनपद में कूट, कुटकी, रोजमेरी, डेंडेलियन और काला जीरा जैसी बहुमूल्य जड़ी-बूटियों का सफलतापूर्वक उत्पादन किया जा रहा है।
इस संवाद कार्यक्रम में परियोजना निदेशक शिल्पी पंत, जिला भेषज समन्वयक ताहिर हुसैन, जिला भेषज संघ के सचिव हुकम सिंह कुंवर, ग्राम प्रधान देशराज कठायत सहित बाछम, कीमू, झुनी, खलझुनी, सोराग, डोला और बोरबलड़ा के प्रगतिशील काश्तकार उपस्थित रहे। यह पहल निस्संदेह बागेश्वर जनपद को जड़ी-बूटी उत्पादन के एक सशक्त केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध होगी।
