राजभवन घेराव में उभरा जनाक्रोश, परिवर्तन की हुंकार से गूंजा देहरादून
देहरादून। प्रदेश में आयोजित राजभवन घेराव ने प्रदेश की राजनीति में एक तीखा संदेश दर्ज कराया, जहां महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और महिलाओं पर बढ़ते अत्याचारों के मुद्दों पर हजारों लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। हाथी बड़कला के पास पुलिस प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया, लेकिन जनसंकल्प के आगे बैरिकेड भी बौने साबित हुए। प्रदर्शनकारियों ने सिर ऊँचा रखकर स्वेच्छा से गिरफ्तारी देते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि लोकतंत्र की आवाज न तो दबेगी और न ही झुकेगी।
इस घेराव को परिवर्तन के महा आगाज़ के रूप में प्रस्तुत करते हुए नेताओं ने कहा कि यह सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि जनता के धैर्य के टूटने और न्याय की मांग का सशक्त प्रतीक है। सरकार पर उदासीनता और सत्ता के संरक्षण में अन्याय को बढ़ावा देने के आरोप लगाते हुए वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि जनसमस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और तीव्र होगा।
राजभवन की ओर कूच करते इस आंदोलन में महिलाओं, युवाओं, सामाजिक संगठनों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं की उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिली। उत्तराखंड कांग्रेस की प्रभारी कुमारी शैलजा, सह-प्रभारीगण, प्रदेश अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष, वरिष्ठ नेता, पूर्व मंत्री, विधायक, पूर्व विधायक, लोकसभा और विधानसभा प्रत्याशी, महिला कांग्रेस, यूथ कांग्रेस, एनएसयूआई और सेवादल के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
नेताओं ने इसे अन्याय के विरुद्ध जन-आक्रोश को संगठित स्वर देने की शुरुआत बताते हुए कहा कि जनहित, न्याय और जवाबदेही की इस लड़ाई में पूरा प्रदेश एकजुट है। उनका कहना था कि राजभवन से उठी यह आवाज अब पूरे देश में उत्तराखंड की जनता के संघर्ष और परिवर्तन की आकांक्षा को नई ऊर्जा देगी।
राजभवन घेराव को “न्याय की पुकार और जनता का अधिकार” बताते हुए आंदोलनकारियों ने एक स्वर में बदलाव की दिशा में संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया। जय हिंद, जय भारत, जय उत्तराखंड के नारों के साथ यह प्रदर्शन राजनीतिक चेतना और जनसंघर्ष का प्रतीक बनकर उभरा।
