रिठाड़ में जैविक खेती की ओर बढ़ते कदम: गरुड़ में यूकॉस्ट की बैठक में गूंजा प्राकृतिक कृषि का संकल्प
गरुड़, बागेश्वर। उत्तराखण्ड के पर्वतीय अंचल में कृषि को पुनः प्राकृतिक स्वरूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए आज बागेश्वर जनपद के गरुड़ विकासखंड में के तत्वावधान में एक विचारोत्तेजक बैठक का आयोजन किया गया। ग्राम रिठाड़ में आयोजित इस संवादात्मक कार्यक्रम में क्षेत्र के अनेक समाजसेवी, जनप्रतिनिधि एवं प्रगतिशील कृषकों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी कर जैविक खेती को जनआंदोलन का स्वर देने का संकल्प व्यक्त किया।
बैठक का केंद्रीय विषय रहा—जैविक खेती और उसके बहुआयामी लाभ। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग ने न केवल भूमि की उर्वरता को क्षीण किया है, बल्कि मानव स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाला है। ऐसे में समय की मांग है कि किसान पुनः पारंपरिक एवं प्राकृतिक कृषि पद्धतियों की ओर उन्मुख हों।
कार्यक्रम में समाजसेवी एवं कृषक ने अपने विचार रखते हुए कहा कि यदि हमें अपनी आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित पर्यावरण और शुद्ध अन्न प्रदान करना है, तो बिना कीटनाशक दवाओं एवं रासायनिक उर्वरकों के खेती करना ही एकमात्र विकल्प है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि जैविक खेती केवल उत्पादन की विधि नहीं, बल्कि जीवनशैली का एक समग्र दर्शन है, जो प्रकृति के साथ संतुलित सह-अस्तित्व का संदेश देता है।
इस आयोजन का संचालन हेतैषी संस्था के अध्यक्ष के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। उन्होंने अपने संबोधन में किसानों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाते हुए जैविक पद्धतियों को व्यवहार में उतारने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि संगठित प्रयास किए जाएं तो गरुड़ क्षेत्र जैविक कृषि के मॉडल के रूप में स्थापित हो सकता है।
बैठक में उपस्थित किसानों ने भी अपने अनुभव साझा किए और जैविक उत्पादों के बढ़ते बाजार मूल्य तथा स्वास्थ्यवर्धक गुणों पर चर्चा की। प्रतिभागियों ने यह विश्वास व्यक्त किया कि यदि प्रशासन, वैज्ञानिक संस्थाएं और किसान एक साझा मंच पर मिलकर कार्य करें, तो पर्वतीय कृषि को नई दिशा और नई पहचान मिल सकती है।
समग्र रूप से यह बैठक केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं रही, बल्कि यह प्राकृतिक कृषि की पुनर्स्थापना के लिए एक गंभीर और दूरदर्शी पहल के रूप में उभरी, जिसने क्षेत्र में जैविक चेतना की नई अलख जगाने का कार्य किया।
